मध्य प्रदेश में इंसानियत की मिसाल: स्कूल बस चालक ने जान देकर 22 बच्चों को बचाया
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से इंसानियत और साहस को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बागचीनी थाना क्षेत्र के नीवरी गांव के पास आज सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक स्कूल बस चालक ने अपनी जान की परवाह किए बिना 22 बच्चों....
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से इंसानियत और साहस को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बागचीनी थाना क्षेत्र के नीवरी गांव के पास आज सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक स्कूल बस चालक ने अपनी जान की परवाह किए बिना 22 बच्चों को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाल लिया।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय सरनाम सिकरवार रोज़ की तरह सुबह स्कूल बस लेकर बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे थे। तभी उम्मेदगढ़ वांसी की पुलिया के पास सामने से एक तेज रफ्तार और बेकाबू कैंटर अचानक उनकी बस की ओर आ गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सरनाम सिकरवार ने असाधारण सूझबूझ और फुर्ती दिखाते हुए बस को तुरंत सड़क के किनारे मोड़ दिया।इस साहसिक फैसले से बस और कैंटर की आमने-सामने की सीधी टक्कर तो टल गई, लेकिन इस प्रयास में चालक को सीने में गंभीर चोट लग गई। मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
22 बच्चों की जान बची, 6 को आई मामूली चोट
इस हादसे में बस में सवार करीब 22 बच्चों की जान बाल-बाल बच गई। हालांकि, 6 बच्चों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।सरनाम सिकरवार पिछले 15 वर्षों से स्कूल वैन चालक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। भावुक कर देने वाली बात यह है कि हादसे के वक्त बस में उनके अपने तीन पोते-पोतियां, उनके छोटे भाई के बच्चे और गांव के अन्य छात्र भी सवार थे। बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्होंने अंतिम सांस तक जिम्मेदारी निभाई।
इलाके में शोक और सम्मान का माहौल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। चश्मदीदों का कहना है कि अगर सरनाम सिकरवार समय रहते बस को सड़क किनारे नहीं मोड़ते, तो हादसा बेहद भयावह हो सकता था। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग चालक की बहादुरी और बलिदान को सलाम कर रहे हैं।पुलिस ने कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।यह हादसा न केवल एक दर्दनाक घटना है, बल्कि एक ऐसे नायक की कहानी भी है, जिसने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया।













