जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र से मांगा सौ करोड़ का विशेष पैकेज, केंद्रीय मंत्री से मिले लखेंद्र कुमार रौशन
सूबे के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने सोमवार को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से नई दिल्ली स्थित उनके मंत्रालय में मुलाकात कर जनजातीय समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से संबंधित ज्ञापन सौंपा। बिहार में अनुसूचित जनजाति समुदाय की संख्या करीब 22 लाख है, जिन्हें इस पैकेज से सीधा लाभ मिलेगा।
DESWA DESK : बिहार की जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष सौ करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का प्रस्ताव रखा है। इस पैकेज की मदद से इन इलाकों में जनजाति समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, शोध संस्थान, कौशल विकास केंद्र समेत अन्य कई क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।
सूबे के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने सोमवार को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से नई दिल्ली स्थित उनके मंत्रालय में मुलाकात कर जनजातीय समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से संबंधित ज्ञापन सौंपा। बिहार में अनुसूचित जनजाति समुदाय की संख्या करीब 22 लाख है, जिन्हें इस पैकेज से सीधा लाभ मिलेगा।
मंत्री ने केंद्र सरकार के स्तर से चलाए जा रहे धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत पटना एम्स में सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकेल सेल एनेमिया बीमारी के उपचार के लिए विशेष सेंटर की स्थापना के लिए 7.86 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया।
जनजातीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए मंत्री ने पश्चिम चंपारण, जमुई, कैमूर, मुंगेर, बक्सर, सिवान, गोपालगंज, अररिया, सारण और मधेपुरा में 10 नए ट्राइबल मल्टी-पर्पस मार्केटिंग सेंटर खोलने का प्रस्ताव भी दिया है। इससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में बिहार को अनुच्छेद 275(1) के तहत 20.83 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो राज्य की जरूरतों के हिसाब से बेहद कम हैं। उन्होंने इस राशि को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया, ताकि इनसे जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई), पटना के भवन निर्माण से संबंधित प्रस्ताव लंबित है। इसकी मंजूरी भी जल्द देने की मांग विभागीय मंत्री ने केंद्र से की है। राज्य सरकार ने करीब 34.39 करोड़ रुपये की लागत से म्यूजियम सह अकादमिक भवन और छात्रावास के निर्माण का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी सिर्फ अकादमिक भवन के एक हिस्से के निर्माण की मंजूरी मिली है। उन्होंने शेष भवनों समेत अन्य जरूरी आधारभूत सुविधाओं की भी स्वीकृति देने का अनुरोध किया।













