जब डीएम बने मास्टर साहब : कटिहार जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने पकड़ी चौक-डस्टर, बच्चों को पढ़ाया गणित का पाठ

आमतौर पर किसी जिले के जिलाधिकारी (डीएम) की छवि एक सख्त प्रशासनिक प्रमुख की होती है, जिनके आदेश पर पूरे जिले की व्यवस्था चलती है। लेकिन, कटिहार में एक उस  वक्त एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आए। क्षेत्र भ्रमण के दौरान कटिहार के डीएम आशुतोष द्विवेदी ने आजमनगर प्रखंड स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) और आर के उच्च विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ उनका एक बेहद संवेदनशील और प्रेरणादायक गुरु का रूप भी सामने आया।

जब डीएम बने मास्टर साहब : कटिहार जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने पकड़ी चौक-डस्टर, बच्चों को पढ़ाया गणित का पाठ

DESWA DESK : आमतौर पर किसी जिले के जिलाधिकारी (डीएम) की छवि एक सख्त प्रशासनिक प्रमुख की होती है, जिनके आदेश पर पूरे जिले की व्यवस्था चलती है। लेकिन, कटिहार में एक उस  वक्त एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आए। क्षेत्र भ्रमण के दौरान कटिहार के डीएम आशुतोष द्विवेदी ने आजमनगर प्रखंड स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) और आर के उच्च विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ उनका एक बेहद संवेदनशील और प्रेरणादायक गुरु का रूप भी सामने आया।

निरीक्षण के क्रम में डीएम सीधे वर्ग क्लासरूम में दाखिल हुए। उन्होंने बच्चों के बीच जाकर न सिर्फ पठन-पाठन का स्तर जांचा, बल्कि खुद हाथ में चौक और डस्टर उठाकर ब्लैकबोर्ड पर गणित के जटिल सवालों को हल कराना शुरू कर दिया। डीएम को अपने बीच बेहद सरल और सहज अंदाज में गणित पढ़ाते देख छात्र-छात्राएं बेहद उत्साहित नजर आए। उन्होंने बच्चों से कई सवाल पूछे और सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों की हौसला अफजाई भी की।

विद्यालय भ्रमण के दौरान डीएम ने मिड-डे मील, साफ-सफाई, पीने के पानी और कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अध्यापकों को सख्त निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। डीएम आशुतोष द्विवेदी का बच्चों को पढ़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच एक अधिकारी का इस तरह बच्चों के बीच जाकर गुरु का फर्ज निभाना न केवल शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ी पहल है, बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है।