विदेश कमाने गया सुपौल का नौशाद जॉर्डन में क्यों हुआ गिरफ्तार, आप भी विदेश जाना चाह रहे तो जान लीजिए वजह ?

गरीबी और तंगहाली की जिंदगी से जूझते रहे सुपौल का नौशाद पैसा कमाकर अच्छी जिंदगी जीने की लालसा में जॉर्डन गया था, लेकिन उसे क्या पता था कि महज चार महीने बाद ही उसे जॉर्डन के जेल में बंद होना पड़ेगा।

विदेश कमाने गया सुपौल का नौशाद जॉर्डन में क्यों हुआ गिरफ्तार, आप भी विदेश जाना चाह रहे तो जान लीजिए वजह ?

DESWA DESK : गरीबी और तंगहाली की जिंदगी से जूझते रहे सुपौल का नौशाद पैसा कमाकर अच्छी जिंदगी जीने की लालसा में जॉर्डन गया था, लेकिन उसे क्या पता था कि महज चार महीने बाद ही उसे जॉर्डन के जेल में बंद होना पड़ेगा। यह खबर जैसे ही परिवार वालों को मिली, परिजनों में कोहराम मच गया। 
दरअसल, राघोपुर थाना क्षेत्र के नगर पंचायत सिमराही वार्ड-5 का रहने वाला नौशाद अली 14 दिसंबर को घर से निकला था। बताया जा रहा कि वह 18 को जॉर्डन पहुंचा, जहां एक कंपनी में उसको काम मिल गया। बताया जा रहा है कि सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, परिजनों की भी फोन पर नौशाद से लगातार बातचीत हो रही थी और 6 मई तक नौशाद से परिजनों बातचीत हुई।
अगले दिन सात मई को पूरे दिन नौशाद से बात नहीं हो पाया। लगातार फोन करने के बावजूद जब नौशाद से बातचीत नहीं हुई तो परिजनों को तरह तरह की चिंता सताने लगी।
जिसके बाद नौशाद की पत्नी ने जॉर्डन में काम कर रहे गांव के ही एक अन्य युवक इम्तियाज को फोन किया। इम्तियाज ने बताया कि नौशाद कमरे पर ही होगा, हम जाकर बात करते हैं। बताया गया कि इम्तियाज ने उसके बाद जॉर्डन में नौशाद की काफी खोजबीन की, उसकी कंपनी और अन्य लोगों से बात की, लेकिन किसी ने नौशाद के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी। इसके बाद नौशाद के घर पर कोहराम मचने लगा कि नौशाद जॉर्डन में कहां गायब हो गया है। इसी बीच 15 मई को अचानक नौशाद का फोन उसकी पत्नी शबाना खातून के मोबाइल पर आया. जिसमें नौशाद ने बताया कि वो एक मामला में फंस गया है और उसे जॉर्डन की पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नौशाद ने कहा कि किसी तरह जुगाड़ करके यह फोन किए हैं।
नौशाद ने फोन पर यह भी बताया कि वो बड़ा मामला में फंस गए है, जॉर्डन में उसे सजा मिल सकती है। इसलिए एम्बेसी से संपर्क कर इस मामले में मदद मांगने की अपील करने की बात  नौशाद ने अपनी पत्नी से कही। नौशाद ने फोन पर अपनी पत्नी शबाना से यह भी कहा कि किसी तरह 5 लाख इंतजाम करना पड़ेगा, तभी कोई वकील कोर्ट में उनकी पैरवी कर सकता है। जिसके बाद फोन कट गया। बताया गया कि उसके बाद आज तक नौशाद से बात नहीं हो सकी है।

19 मई को जॉर्डन से एक व्यक्ति का फोन नौशाद की पत्नी शबाना खातून के नंबर पर आया, जिसमें कॉल करने वाले ने नौशाद के बड़े भाई का नंबर मांगा। जिसमें बताया गया कि नौशाद को छुड़ाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी होगी, जिसमें करीब 5 लाख का खर्च आएगा। आशंका यह भी जताई गई कि समय रहते यह कार्य नहीं किया गया तो नौशाद की सजा लंबी हो सकती है। ये सब बाते सुनते ही नौशाद कि बीवी शबाना खातून के पैरों तले जमीन खिसक गई।

दरअसल, नौशाद की पत्नी तीन बच्चों के साथ सिमराही स्थित अपने घर पर रहती है, जिसका पालन-पोषण नौशाद बाहर कमाकर करता रहा है। पहले नौशाद दिल्ली में रहता था, लेकिन उससे गुजारा नहीं चला तो गांव के ही एक व्यक्ति जो जॉर्डन में पहले से रहता था, उसके प्रयास से वीजा बनाकर जॉर्डन चला गया। बताया जा रहा है कि घर की हालत ऐसी है की टूटे हुए झोपड़ी में किसी तरह नौशाद की बीवी अपने तीन छोटे छोटे बच्चों के साथ रहकर दिन काट रही है, ऐसे में पांच लाख रुपये का इंतजाम करना उसके लिए कठिन ही नहीं असंभव प्रतीत हो रहा है।

एक तरफ उसका पति जॉर्डन के जेल में बंद है वहीं दूसरी तरफ उसे अब बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है कि उसका पालन-पोषण पोषण कैसे होगा। ऐसे में शबाना खातून पूरी तरह से टूट चुकी है और अब एकमात्र उम्मीद सरकार से रह गई है, सरकार ही कोई मदद करे तो नौशाद की रिहाई संभव हो सकती है। आसपास के लोग इस घटना की जानकारी मिलने के बाद शबाना खातून के पास मिलने आते हैं और उन्हें दिलासा देकर वापस चले जाते हैं, लेकिन जॉर्डन की जेल में बंद उसके पति की रिहाई कैसे होगी, इसको लेकर कोई कुछ आश्वासन नहीं दे रहा है।
लाचार शबाना खातून अब केंद्र और राज्य सरकार से पति की रिहाई के लिए मदद की गुहार लगा रही है, शबाना ने सरकार से मांग की है कि उनके पति की रिहाई में सरकार मदद करे। कहा कि सरकार उनके पति को जॉर्डन से किसी तरह रिहा कराकर सकुशल यहां लाने में उनकी मदद करे।