जदयू दफ्तर में हंगामा : निष्कासित नेता छोटू सिंह के समर्थकों ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने की नारेबाजी
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान बुधवार को एक बार फिर सड़क पर आ गई। अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर किए गए पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिद अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह की वापसी को लेकर आज जदयू प्रदेश कार्यालय में उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। जैसे ही बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पार्टी दफ्तर पहुंचे, पहले से मौजूद छोटू सिंह के समर्थकों ने अपने नेता की पार्टी में ससम्मान वापसी की मांग को लेकर 'छोटू सिंह को वापस लो' जैसे जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
DESWA DESK : जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान बुधवार को एक बार फिर सड़क पर आ गई। अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर किए गए पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिद अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह की वापसी को लेकर आज जदयू प्रदेश कार्यालय में उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। जैसे ही बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पार्टी दफ्तर पहुंचे, पहले से मौजूद छोटू सिंह के समर्थकों ने अपने नेता की पार्टी में ससम्मान वापसी की मांग को लेकर 'छोटू सिंह को वापस लो' जैसे जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
अचानक हुए इस नारेबाजी से दफ्तर में अफरातफरी मच गई, जिसके बाद मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने फौरन मोर्चा संभाला और नारेबाजी कर रहे समर्थकों को परिसर से बाहर खदेड़ा। इस पूरे सियासी ड्रामे की शुरुआत जदयू की नई सांगठनिक टीम की घोषणा के साथ हुई थी। लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले छोटू सिंह को जब नई टीम में जगह नहीं मिली, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।
छोटू सिंह ने नई टीम में जगह न मिलने के लिए पार्टी के कद्दावर नेताओं ललन सर्राफ और संजय गांधी को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर कई गंभीर आरोप मढ़े। आक्रोशित छोटू सिंह अपने समर्थकों के साथ सीधे जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंच गए। वहां बातचीत के दौरान बात इतनी बिगड़ गई कि संजय झा और छोटू सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के साथ किए गए इस व्यवहार को जदयू नेतृत्व ने घोर अनुशासनहीनता माना। बिना समय गंवाए पार्टी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छोटू सिंह को छह साल के लिए जदयू से निष्कासित कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में छोटू सिंह को बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी का बेहद करीबी माना जाता रहा है। पार्टी के तमाम बड़े आयोजनों में उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती थी। निष्कासन के बाद से ही छोटू सिंह पार्टी में अपनी दोबारा एंट्री के लिए लगातार हाथ-पांव मार रहे थे और बैकचैनल से बड़े नेताओं को साधने की कोशिश में जुटे थे। आज उनके समर्थकों द्वारा स्वास्थ्य मंत्री के सामने नारेबाजी भी इसी डैमेज कंट्रोल की एक नाकाम कोशिश माना जा रहा है।
सियासी जानकारों का कहना है कि आज हुए हंगामे और छोटू सिंह के हालिया तेवरों के बाद अब उनकी वापसी की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। दरअसल, गुस्से में आए छोटू सिंह ने अपनी भड़ास निकालते हुए पार्टी के कई नेताओं पर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को हाईजैक करने का सनसनीखेज आरोप लगा दिया था। जदयू जैसी अनुशासित पार्टी में सीधे नीतीश कुमार जैसे सर्वमान्य नेता को लेकर दिया गया ऐसा बयान लक्ष्मण रेखा पार करने जैसा माना जा रहा है। इस बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि छोटू सिंह की जदयू में वापसी की राह आसान नहीं है।













