मालवाहक वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट और नए नियमों के तहत इनफोर्समेंट तेज, जानें चालक-मालिक के अधिकार और बचने के उपाय

ड्राइवर को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसकी गाड़ी का वजन किस प्रमाणित मशीन (धर्मकांटे) पर हुआ है। वह वजन की रसीद मांग सकता है। अधिकारियों को चेकिंग का हक है, लेकिन वे ड्राइवर के साथ मारपीट या अभद्र व्यवहार नहीं कर सकते। ड्राइवर इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। नए नियमों के तहत हर जुर्माने या फास्टैग कटौती की पारदर्शी और डिजिटल रसीद प्राप्त करना ड्राइवर का अधिकार है।

मालवाहक वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट और नए नियमों के तहत इनफोर्समेंट तेज, जानें चालक-मालिक के अधिकार और बचने के उपाय

DESWA DESK : अगर आप मालवाहक वाहन (कमर्शियल गाड़ी) के मालिक हैं या उसे चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। सड़कों को समय से पहले टूटने से बचाने और सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ओवरलोडिंग के खिलाफ नियम और सख्त कर दिए हैं। अब हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों की तौल डिजिटल तरीके से होगी और पकड़े जाने पर न सिर्फ भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि नए नियमों के तहत टोल टैक्स भी दोगुने से चार गुना तक वसूला जा सकता है।

मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम के तहत मालवाहक वाहनों में क्षमता से अधिक वजन लादने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। गाड़ी में तय सीमा से एक किलो भी ज्यादा वजन होने पर सीधा 20 हजार का बेस चालान कटता है। इसके अलावा, तय सीमा से जितना भी अधिक वजन (प्रति टन) होगा, उसके लिए दो हजार प्रति टन की दर से अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।

इतना ही नहीं, अधिकारी गाड़ी को तब तक आगे बढ़ने से रोक सकते हैं, जब तक कि अतिरिक्त माल को वहीं किसी सुरक्षित जगह पर उतार न दिया जाए। माल उतारने का खर्च भी गाड़ी मालिक को ही उठाना होता है।

हालिया संशोधनों के अनुसार, नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर लगे वेब्रिज (तौल कांटे) पर अगर गाड़ी 10 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक ओवरलोड मिलती है, तो उससे दोगुना टोल वसूला जाएगा। वहीं, अगर ओवरलोडिंग 40 प्रतिशत से अधिक है, तो चार गुना टोल देना होगा। यह राशि सीधे फास्टैग से काटी जाएगी।

अक्सर चेकिंग के दौरान ड्राइवर और इनफोर्समेंट ऑफिसर के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे में कानून दोनों पक्षों को कुछ अधिकार देता है। इनफोर्समेंट ऑफिसर (परिवहन विभाग, पुलिस) को किसी भी संदिग्ध मालवाहक वाहन को रोककर उसकी तौल कराने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा गाड़ी के कागजात (आरसी, परमिट, फिटनेस, इंश्योरेंस) की जांच करने और ओवरलोडिंग मिलने पर वाहन को जब्त करने का अधिकार है। वे गाड़ी को तब तक रोक सकते हैं जब तक कानूनी प्रक्रिया और जुर्माना भरने का काम पूरा न हो जाए।

वहीं, ड्राइवर को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसकी गाड़ी का वजन किस प्रमाणित मशीन (धर्मकांटे) पर हुआ है। वह वजन की रसीद मांग सकता है। अधिकारियों को चेकिंग का हक है, लेकिन वे ड्राइवर के साथ मारपीट या अभद्र व्यवहार नहीं कर सकते। ड्राइवर इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। नए नियमों के तहत हर जुर्माने या फास्टैग कटौती की पारदर्शी और डिजिटल रसीद प्राप्त करना ड्राइवर का अधिकार है।

ओवरलोडिंग के झंझट और मोटी पेनाल्टी से बचने के लिए गाड़ी लोड करने से पहले हमेशा उसकी आरसी बुक में लिखी 'ग्रॉस व्हीकल वेट' यानी गाड़ी और माल का कुल मिलाकर तय वजन जरूर जांच लें। माल गोदाम या फैक्ट्री से निकलते ही सबसे पहले किसी नजदीकी प्रमाणित धर्मकांटे पर गाड़ी का वजन कराएं और उसकी रसीद अपने पास सुरक्षित रखें।

अगर माल भेजने वाली कंपनी तय सीमा से अधिक माल लादने का दबाव बनाए, तो मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं का हवाला देकर मना करें, क्योंकि जुर्माना गाड़ी मालिक और ड्राइवर को ही भुगतना पड़ता है। गाड़ी के डाले (बॉडी) में माल को इस तरह फैलाकर रखें कि सभी एक्सल (धुरों) पर बराबर वजन पड़े। 

कई बार कुल वजन सही होता है, लेकिन किसी एक एक्सल पर ज्यादा लोड होने से भी गाड़ी तकनीकी रूप से ओवरलोड मान ली जाती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग सिर्फ कानूनन अपराध नहीं है, बल्कि यह गाड़ी के ब्रेक फेल होने और टायर फटने का भी सबसे बड़ा कारण है।