दीदारगंज टोल प्लाजा पर खाकी शर्मसार: ट्रैफिक पुलिस का 'मंथली' खेल कैमरे में कैद, सौ रुपये रोज पर कटता है 'नो-चेकिंग' पास

राजधानी पटना के दीदारगंज टोल प्लाजा स्थित नेशनल हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी संभालने वाली ट्रैफिक पुलिस खुद भ्रष्टाचार के जाम में फंसी नजर आ रही है। हाईवे पर तैनात जवानों को अब नियमों के पालन से ज्यादा मालवाहक गाड़ियों का इंतजार रहता है, ताकि उन्हें डरा-धमकाकर अवैध उगाही की जा सके। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद किए गए एक गुप्त स्टिंग ऑपरेशन में खाकी की आड़ में चल रहा यह काला खेल पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

दीदारगंज टोल प्लाजा पर खाकी शर्मसार: ट्रैफिक पुलिस का 'मंथली' खेल कैमरे में कैद, सौ रुपये रोज पर कटता है 'नो-चेकिंग' पास

DESWA DESK : राजधानी पटना के दीदारगंज टोल प्लाजा स्थित नेशनल हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी संभालने वाली ट्रैफिक पुलिस खुद भ्रष्टाचार के जाम में फंसी नजर आ रही है। हाईवे पर तैनात जवानों को अब नियमों के पालन से ज्यादा मालवाहक गाड़ियों का इंतजार रहता है, ताकि उन्हें डरा-धमकाकर अवैध उगाही की जा सके। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद किए गए एक गुप्त स्टिंग ऑपरेशन में खाकी की आड़ में चल रहा यह काला खेल पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

दीदारगंज में तैनात ट्रैफिक जवान अमित कुमार ट्रकों के सुरक्षित परिचालन के बदले सरेआम 'मंथली' (मासिक घूस) की डील करते कैमरे पर रंगे हाथों पकड़े गए हैं। पूरे नेक्सस का पर्दाफाश करने के लिए जब संवाददाता ने एक फैक्ट्री वर्कर बनकर ट्रैफिक जवान अमित कुमार से मुलाकात की, तो पुलिसिया ईमानदारी की धज्जियां उड़ गईं। गाड़ियों को बिना किसी परेशानी के निकालने के सवाल पर जवान ने बिना किसी झिझक के सीधे 'मंथली फिक्स' करने का प्रस्ताव दे दिया।

बातचीत के दौरान जवान ने संवाददाता से पूछा कि उनकी कुल कितनी गाड़ियां चलती हैं। पांच से छह ट्रकों की बात सामने आने पर जवान अमित कुमार ने बकायदा एक कॉरपोरेट स्टाइल में रेट तय किया। कहा कि प्रति ट्रक सौ रुपये प्रतिदिन दीजिए, यानी कि प्रति महीना छह हजार रुपये देने पर पासिंग में कोई परेशानी नहीं होगी। डील पक्की करते हुए जवान अमित कुमार ने कहा कि सभी गाड़ियों के नंबरों की लिस्ट मुझे सौंप दें। नंबर आते ही ट्रकों को बिना किसी चेकिंग के छोड़ दिया जाएगा। जवान ने यह भी आश्वस्त किया कि वह चौराहे पर तैनात दो शिफ्टों के बाकी स्टाफ को भी इसके बारे में बोल देगा ताकि गाड़ियों को कोई दिक्कत न हो।

भ्रष्टाचार के इस समझौते के दौरान जवान ने साफ कर दिया कि केवल मुख्यमंत्री के काफिले या किसी अन्य वीवीआईपी मूवमेंट के समय ही गाड़ियों को रोका जाएगा, इसके अलावा उन्हें पूरे दीदारगंज इलाके में कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि, जवान ने अपनी सीमा की मर्यादा का ध्यान रखते हुए एक नसीहत भी दी कि यह सेटिंग सिर्फ इसी दीदारगंज पॉइंट के लिए है, बाकी अन्य जगहों पर क्या चलता है और वहां कैसे मैनेज करना है, यह तो मालिक लोग जानते ही होंगे।

हाईवे से गुजरने वाले कई ट्रक ड्राइवरों ने इस वसूली तंत्र की पूरी कलई खोलकर रख दी। ग्राउंड जीरो पर ड्राइवरों ने बताया कि दीदारगंज चौराहे पर 'रॉन्ग साइड' (गलत दिशा) से भी सुरक्षित निकलने के लिए प्रति ट्रक 100 से 200 रुपये तक की अवैध वसूली हर रोज की जाती है। जो ड्राइवर पैसे दे देता है, उसकी गाड़ी बिना किसी रोक-टोक के पार हो जाती है। जो मना करता है या नियम की बात करता है, उसे कागजात के नाम पर घंटों रोककर प्रताड़ित किया जाता है।

यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार से हजारों रुपये की बंधी-बंधाई सैलरी पाने वाले कुछ पुलिसकर्मी चंद रुपयों के लालच में खाकी को दागदार कर रहे हैं। दो शिफ्टों में चलने वाले इस खेल से महीने के लाखों रुपये डकारे जा रहे हैं। कैमरे पर पुख्ता सबूत आने के बाद अब देखना यह है कि पटना पुलिस के आला अधिकारी इस भ्रष्ट तंत्र और आरोपी जवान पर क्या कार्रवाई करते हैं।