“मेरी मां का हाथ काट दिया सर…” जवान का फोन आते ही 50 ITBP जवानों संग कमिश्नरी पहुंच गया कमांडेंट
सर… मेरी मां को सांस लेने में दिक्कत थी। अस्पताल लेकर गया… ICU में भर्ती किया, लेकिन बिना बताए उनका हाथ काट दिया गया…” बता दें कि उत्तर प्रदेश के ...
सर… मेरी मां को सांस लेने में दिक्कत थी। अस्पताल लेकर गया… ICU में भर्ती किया, लेकिन बिना बताए उनका हाथ काट दिया गया…”
बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़ा एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि आईटीबीपी (ITBP) के एक जवान ने अपने कमांडेंट गौरव को फोन कर बताया कि उसकी मां को सांस लेने में दिक्कत होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान बिना अनुमति उनके हाथ काट दिए गए। जवान का आरोप है कि न तो परिवार से सहमति ली गई और न ही किसी प्रकार के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए।
थाना स्तर पर FIR दर्ज नहीं की जा रही थी
इतना ही नहीं, पीड़ित जवान ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में थाना स्तर पर FIR दर्ज नहीं की जा रही थी और वह लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा था।बताया जा रहा है कि अपने जवान की बात सुनने के बाद आईटीबीपी कमांडेंट गौरव ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले को गंभीरता से लिया। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई होती नहीं दिखी तो उन्होंने अपनी बटालियन के जवानों को तैयार रहने का आदेश दिया और करीब 50 जवानों के साथ कानपुर कमिश्नरी पहुंच गए।
पूरे इलाके में हड़कंप मच गया
हालांकि, यह कदम किसी कार्रवाई के लिए नहीं बल्कि प्रशासन पर दबाव बनाने और मामले को गंभीरता से उठाने के उद्देश्य से बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
लोग इस घटना को आम नागरिकों की समस्याओं से जोड़कर भी देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का कहना है कि जब सुरक्षा बल के जवान को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम गरीब व्यक्ति की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम ने सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। “जब वर्दी वाले को न्याय के लिए इतनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है, तो बिना पहचान और बिना पहुंच वाले आम आदमी की हालत क्या होती होगी।
अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। वहीं, कमांडेंट के इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अपने जवान के समर्थन में उठाया गया साहसी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अनुशासन और प्रक्रिया से जुड़ा विषय मान रहे हैं।अब देखना होगा कि प्रशासन और विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं।













