बांकीपुर उपचुनाव को लेकर महागठबंधन में रार, आरजेडी ने रेखा गुप्ता को उतारा, मुंह देखती रह गई कांग्रेस

महागठबंधन के भीतर चल रही भारी खींचतान और दावों-प्रतिदावों के बीच आरजेडी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए रेखा गुप्ता को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर महागठबंधन में रार, आरजेडी ने रेखा गुप्ता को उतारा, मुंह देखती रह गई कांग्रेस

DESWA DESK : बिहार की सियासत का सबसे दिलचस्प अखाड़ा अब पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट बन गया है। बीजेपी के कद्दावर नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है और आज से नामांकन भी शुरू हो चुका है। महागठबंधन के भीतर चल रही भारी खींचतान और दावों-प्रतिदावों के बीच आरजेडी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए रेखा गुप्ता को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने रेखा कुमारी गुप्ता के नाम पर मुहर लगाते हुए साफ कर दिया है कि राजद इस सीट पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगा। राजद के इस कदम ने महागठबंधन के सहयोगी दलों, खासकर कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। बांकीपुर सीट को लेकर महागठबंधन के भीतर पिछले कई दिनों से रस्साकशी जारी थी। कांग्रेस इस सीट को अपनी पारंपरिक सीट बताते हुए लगातार दावा ठोक रही थी। कांग्रेस नेताओं का तर्क था कि पिछले चुनावों में यह सीट उनके खाते में रही है, इसलिए इस बार भी हक उनका ही बनता है। 

लेकिन लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के दावों को दरकिनार करते हुए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। राजद के इस फैसले से साफ है कि वह पटना के शहरी क्षेत्र में अपनी पकड़ को नए सिरे से मजबूत करना चाहती है। बांकीपुर का यह उपचुनाव महज दो पारंपरिक गठबंधनों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि रेखा कुमारी गुप्ता को मैदान में उतारकर महिला कार्ड और जातीय समीकरण को साधने की कोशिश आरजेडी ने की है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर खुद इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की पार्टी जेजेडी ने वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर जहां विपक्ष और अन्य दलों ने अपनी गोटियां सेट कर दी हैं, वहीं खबर लिखे जाने तक भाजपा ने अपने उम्मीदवार के नाम का खुलासा नहीं किया है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव आगामी आम चुनावों से पहले सूबे का मूड भांपने का लिटमस टेस्ट साबित होगा। एक तरफ जहां राजद को अपनों और सहयोगियों (कांग्रेस) की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है, वहीं प्रशांत किशोर की मौजूदगी इस लड़ाई को बेहद कांटेदार बना रही है। अब गेंद पूरी तरह से भाजपा के पाले में है कि वह इस किले को बचाने के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है। वैसे सूत्रों की मानें तो नील रतन घोष का नाम फाइनल माना जा रहा है। लेकिन प्रो. रणवीर नंदन, अजय आलोक और आशीष कुमार सिन्हा के नाम की भी चर्चा है।