सियासी घमासान : राजद बोला-धरातल पर हम सबसे मजबूत, कांग्रेस का पलटवार-बांकीपुर हमारी पारंपरिक सीट

राजधानी पटना की बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन (इंडी गठबंधन) के भीतर सीटों को लेकर रार खुलकर सामने आ गई है। कभी जनसुराज समर्थित प्रत्याशी को मदद देने की वकालत करने वाली कांग्रेस ने अब इस सीट पर अपना सीधा दावा ठोक दिया है। 

सियासी घमासान : राजद बोला-धरातल पर हम सबसे मजबूत, कांग्रेस का पलटवार-बांकीपुर हमारी पारंपरिक सीट

DESWA DESK : राजधानी पटना की बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन (इंडी गठबंधन) के भीतर सीटों को लेकर रार खुलकर सामने आ गई है। कभी जनसुराज समर्थित प्रत्याशी को मदद देने की वकालत करने वाली कांग्रेस ने अब इस सीट पर अपना सीधा दावा ठोक दिया है। 

वहीं, महागठबंधन की सबसे बड़ी हिस्सेदार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी बांकीपुर से पीछे हटने से साफ इनकार करते हुए अपना प्रत्याशी उतारने का खुला ऐलान कर दिया है। दोनों प्रमुख दलों के बीच मची इस खींचतान ने गठबंधन के भीतर ऑल इज नॉट वेल के संकेत दे दिए हैं, जिसपर सत्ताधारी जदयू और बीजेपी ने भी तंज कसना शुरू कर दिया है।

बांकीपुर सीट पर दावेदारी की शुरुआत करते हुए राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट कर दिया कि इस सीट पर उनकी पार्टी का दावा सबसे मजबूत है। उन्होंने कहा कि पटना की बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल अपना उम्मीदवार उतारेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में भी हमारे उम्मीदवार को यहां लगभग 44 हजार वोट मिले थे। राजद धरातल पर सबसे मजबूत और बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी है, इसलिए इस सीट पर हमारा दावा स्वाभाविक है।

राजद के इस खुले ऐलान पर कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता असितनाथ तिवारी ने राजद को नसीहत देते हुए कहा कि बांकीपुर कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है, इसलिए दावेदारी हमारी ही मजबूत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर सीट पर अंतिम फैसला इंडी गठबंधन के तमाम घटक दलों को मिलकर लेना है, कोई अकेला निर्णय नहीं ले सकता। 

अगर गठबंधन का कोई दल बिना सहयोगियों से बातचीत किए सीट पर दावा ठोक रहा है या उम्मीदवार की घोषणा कर रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि वह खुद को गठबंधन से अलग मान रहा है। वह बाकी दलों को महत्व नहीं दे रहा। हम भी किसी ऐसे सहयोगी को तरजीह देने के लिए मजबूर या विवश नहीं हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक कांग्रेस के भीतर एक धड़ा बांकीपुर सीट पर जनसुराज के प्रत्याशी का समर्थन करने की रणनीति पर विचार कर रहा था। लेकिन अब बदले सियासी समीकरणों के बीच कांग्रेस ने अपने ही सहयोगी राजद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

महागठबंधन के भीतर मचे इस घमासान पर सत्ताधारी राष्ट्रीय एनडीए ने भी चुटकी ली है। बीजेपी और जदयू नेताओं का कहना है कि यह तथाकथित इंडी गठबंधन सिर्फ स्वार्थ का 'ठगबंधन' है। अभी तो सिर्फ एक सीट के उपचुनाव की बात है, मुख्य चुनाव आते-आते यह गठबंधन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा। बहरहाल, बांकीपुर की इस 'रार' ने पटना से लेकर दिल्ली तक के शीर्ष नेतृत्व की सिरदर्दी बढ़ा दी है।