बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन आज से, क्या विपक्ष उतारेगा साझा उम्मीदवार? बीजेपी के गढ़ को बचाने के लिए कौन होगा उम्मीदवार..?
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर सरगर्मी तेज है कि क्या प्रशांत किशोर को भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का साझा उम्मीदवार बनाया जा सकता है? चर्चा है कि भाजपा को उसके इस पारंपरिक गढ़ में पटखनी देने के लिए विपक्ष पर्दे के पीछे से कोई बड़ा दांव खेलने की रणनीति बना रहा है। हालांकि, जन सुराज ने अब तक अकेले दम पर चलने की बात कही है, लेकिन नामांकन शुरू होने के साथ ही गठबंधनों के भीतर नए समीकरणों की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
DESWA DESK : बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की रणभेरी बज चुकी है। निर्वाचन आयोग के शेड्यूल के मुताबिक, इस सीट के लिए नामांकन की प्रक्रिया आज यानी सोमवार से शुरू हो चुकी है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा खुद चुनावी मैदान में उतरने की औपचारिक घोषणा के बाद बांकीपुर का दंगल बेहद दिलचस्प होने के आसार बन गए हैं। यह पहला मौका होगा जब प्रशांत किशोर किंगमेकर की भूमिका से बाहर निकलकर खुद सीधे तौर पर चुनावी रण में अपना भाग्य आजमाएंगे।
राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर सरगर्मी तेज है कि क्या प्रशांत किशोर को भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का साझा उम्मीदवार बनाया जा सकता है? चर्चा है कि भाजपा को उसके इस पारंपरिक गढ़ में पटखनी देने के लिए विपक्ष पर्दे के पीछे से कोई बड़ा दांव खेलने की रणनीति बना रहा है। हालांकि, जन सुराज ने अब तक अकेले दम पर चलने की बात कही है, लेकिन नामांकन शुरू होने के साथ ही गठबंधनों के भीतर नए समीकरणों की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
दूसरी तरफ, बांकीपुर सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर से टिकट के दावेदारों में तीन नाम सबसे आगे चल रहे हैं। इनमें प्रो. रणवीर नंदन, नील रतन घोष और डॉ. अजय आलोक के नाम शामिल हैं। चूंकि यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने और विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है, इसलिए इस सीट पर उम्मीदवार का चयन पूरी तरह से पार्टी अध्यक्ष की मर्जी और केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मुहर पर निर्भर करेगा। परिपाटी के अनुसार, इसी सप्ताह भाजपा अपने प्रत्याशी के नाम की औपचारिक घोषणा कर देगी।
रणनीति को धार देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में भाजपा के शीर्ष दिग्गजों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में चुनावी चक्रव्यूह तैयार करने के साथ-साथ जमीनी फीडबैक पर चर्चा की गई। बांकीपुर सीट पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से भाजपा का अभेद्य किला रही है। नितिन नवीन यहां से लगातार जीतते आ रहे थे। ऐसे में प्रशांत किशोर के इस मैदान में उतरने से यह चुनाव केवल एक सीट का उपचुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला एक बड़ा जनमत संग्रह माना जा रहा है।













