पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी और सीएम सम्राट चौधरी ने जताया शोक

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि 'प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपनी अद्वितीय कला, सशक्त स्वर और समर्पण से भारतीय लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।'

पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी और सीएम सम्राट चौधरी ने जताया शोक

DESWA DESK : देश की प्रतिष्ठित पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उन्होंने रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है। 70 वर्षीय तीजन बाई पिछले कई हफ्तों से गंभीर रूप से बीमार थीं और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। रविवार तड़के करीब सवा तीन बजे अचानक उनकी तबीयत और अधिक बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

 उनके निधन की खबर फैलते ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने लिखा-'सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!'

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि 'प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपनी अद्वितीय कला, सशक्त स्वर और समर्पण से भारतीय लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।'

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में 1956 में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की एक अद्वितीय मिसाल रहा है। उन्होंने महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली 'पंडवानी' को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे वैश्विक मंच पर एक नया आयाम दिया। तीजन बाई ने उस दौर में पंडवानी की 'कापालिक शैली' को अपनाया, जिस पर पारंपरिक रूप से केवल पुरुषों का वर्चस्व हुआ करता था। एक महिला होकर इस शैली को अपनाने के कारण शुरुआत में उन्हें भारी सामाजिक विरोध, बहिष्कार और बंधनों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

अपनी दमदार और कड़क आवाज, अद्वितीय अभिनय कला और हाथ में तंबूरा लेकर जब तीजन बाई मंच पर उतरती थीं, तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। मंच पर उनका जीवंत अभिनय ऐसा होता था कि तंबूरा कभी अर्जुन का गांडीव धनुष बन जाता, तो कभी भीम की गदा। पांच दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि एशिया, यूरोप और दुनिया के कोने-कोने में छत्तीसगढ़ की माटी की इस कला का परचम लहराया। उन्होंने कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और भारत की सबसे खास लोक परंपराओं में से एक को दुनिया भर में एक अमिट पहचान दिलाई। उनका जाना भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है, लेकिन उनकी गूंज दुनिया भर के कला प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी।