लालू-राबड़ी को अब जेड कैटेगरी सुरक्षा, समीक्षा के बाद लिया गया बड़ा निर्णय, जानिए कितने एनएसजी कमांडो होंगे तैनात !
बिहार की सियासत में सुरक्षा घेरे को लेकर चल रहा 'हाई वोल्टेज ड्रामा' आखिरकार एक नए मोड़ पर आकर थम गया है। सम्राट चौधरी की सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया है।
DESWA NEWS : बिहार की सियासत में सुरक्षा घेरे को लेकर चल रहा 'हाई वोल्टेज ड्रामा' आखिरकार एक नए मोड़ पर आकर थम गया है। सम्राट चौधरी की सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया है। हालांकि, शुक्रवार की देर रात तक इस फैसले की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हो सकी थी। दिलचस्प बात यह है कि खुद लालू परिवार को भी इसकी भनक मीडिया के जरिए ही लगी है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि खबर लिखे जाने तक उन्हें गृह विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले महीने की चार जून से जुड़ी हैं, जब दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा में बड़ा बदलाव किया गया था। सरकार ने लालू-राबड़ी को मिली जेड प्लस सुरक्षा को हटाकर पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मिलने वाली सामान्य एसएसजी सुरक्षा में तब्दील कर दिया था। इस फैसले से नाराज होकर दोनों नेताओं ने विरोध स्वरूप अपनी पूरी सुरक्षा ही सरकार को वापस लौटा दी थी। सुरक्षा हटाए जाने को राजद ने बदले की राजनीति करार दिया। देखते ही देखते 10 सर्कुलर रोड (राबड़ी आवास) के बाहर राजद कार्यकर्ताओं का हुजूम जुट गया था और कार्यकर्ताओं ने खुद ही अपने नेताओं की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया था।
इस बीच लालू प्रसाद यादव बिना किसी सुरक्षा घेरे के घर से बाहर निकले, जिसपर भाजपा ने चुटकी लेते हुए कहा था कि लालू जी का बिना सुरक्षा घूमना साबित करता है कि उन्हें कोई खतरा नहीं है। सियासी विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने चौतरफा राजनीतिक दबाव और लालू प्रसाद के जन-आधार को देखते हुए बीच का रास्ता निकाला है। जेड प्लस न सही, लेकिन जेड कैटेगरी देकर सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। अब लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के चारों ओर सुरक्षा की अभेद्य दीवार होगी। जेड श्रेणी की सुरक्षा के तहत उन्हें कुल 22 सुरक्षाकर्मी मिलेंगेजो शिफ्ट के अनुसार चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे। इनमें चार से पांच राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के विशेष कमांडो भी होंगे। इसके साथ ही, एक बुलेटप्रूफ एस्कॉर्ट कार उनके काफिले के आगे या पीछे चलेगी।
भले ही सरकार ने सुरक्षा बहाल करने का मन बना लिया हो, लेकिन इसपर राजनीति थमती नहीं दिख रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सरकार को अपनी गलती का अहसास हुआ है। लालू जी करोड़ों बिहारियों के दिल में रहते हैं, उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ सूबे की जनता बर्दाश्त नहीं करती। सत्तापक्ष के सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा देना या घटाना कोई राजनीतिक स्टंट नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा के आधार पर लिया गया एक प्रशासनिक निर्णय है। अब सबकी नजरें राजभवन और गृह विभाग की उस आधिकारिक चिट्ठी पर टिकी हैं, जो इस जेड श्रेणी की सुरक्षा पर मुहर लगाएगी।













