बांकीपुर की हार से पटना से दिल्ली तक हलचल; पीएम मोदी से मिले नीतीश कुमार, मुलाकात के निकाले जा रहे गहरे सियासी मायने
प्रधानमंत्री के चैंबर में हुई इस अहम मुलाकात में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद रहे। हालांकि, मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने इसे शिष्टाचार भेंट करार दिया है, लेकिन बांकीपुर जैसे भाजपा के गढ़ के ढहने के ठीक बाद हुई इस बैठक ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
DESWA DESK : बिहार की सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में शुमार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली अप्रत्याशित हार के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में खलबली मच गई है। चुनावी नतीजों के अगले ही दिन मंगलवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री के चैंबर में हुई इस अहम मुलाकात में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद रहे। हालांकि, मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने इसे शिष्टाचार भेंट करार दिया है, लेकिन बांकीपुर जैसे भाजपा के गढ़ के ढहने के ठीक बाद हुई इस बैठक ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा सीट 1995 से भाजपा का अजेय किला माना जाता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर पार्टी की हार को एनडीए के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लड़ा गया यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसके नतीजों ने गठबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भले ही जदयू नेता इस बैठक को औपचारिक मुलाकात बता रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कई अहम कोणों से देख रहे हैं। बांकीपुर की हार के बाद एनडीए के दो सबसे बड़े सहयोगियों (भाजपा और जदयू) के बीच गठबंधन के भविष्य और बिहार की मौजूदा प्रशासनिक छवि को लेकर विचार-विमर्श की संभावना जताई जा रही है। राज्य में सत्ता हस्तांतरण के बाद बदले सियासी माहौल और विपक्ष तथा जन सुराज की ओर से लगातार साधे जा रहे निशानों के बीच केंद्रीय नेतृत्व को जमीनी फीडबैक देना भी इस मुलाकात की एक मुख्य वजह माना जा रहा है।
बिहार में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक तालमेल और सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को लेकर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच गंभीर चर्चा होने की अटकलें हैं। फिलहाल, बांकीपुर के जनादेश के बाद जहां एक तरफ भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर इस हार का आत्ममंथन करने की बात कह रही है, वहीं दिल्ली में नीतीश कुमार और पीएम मोदी की इस मुलाकात ने बिहार एनडीए के भीतर आने वाले दिनों रणनीति में बदलाव के बड़े संकेत दे दिए हैं।













