पटना में गंगा नदी ने तोड़ा दस साल का रिकाॅर्ड; नौ नदियां खतरे के निशान से उपर, बिहार के 11 जिलों की 201 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित

गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि एवं गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले एक से तीन दिनों तक मोकामा के हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है। यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसको देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

पटना में गंगा नदी ने तोड़ा दस साल का रिकाॅर्ड; नौ नदियां खतरे के निशान से उपर, बिहार के 11 जिलों की 201 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित

DESWA DESK : पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी ने वर्ष 2016 के उच्चतम जलस्तर का रिकाॅर्ड तोड़ दिया है। दीघा घाट पर गंगा नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है। पुनपुन नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। इससे दानापुर, बख्तियारपुर, मोकामा और अन्य दियारा इलाका बाढ़ के पानी में डूब चुका है। गंगा समेत नौ नदिया खतरे के निशान से उपर बह रही है। बिहार के 11 जिलों की 201 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है।

गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि एवं गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले एक से तीन दिनों तक मोकामा के हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है। यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसको देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

गांधी घाट पर बढ़े हुए जलस्तर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थलों एवं निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा आवश्यकता के अनुसार एहतियाती उपाय पहले से करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी संबंधित विभागीय एवं क्षेत्रीय अभियंताओं को बाढ़ नियंत्रण से संबंधित सभी संसाधनों एवं मशीनरी को तैयार स्थिति में रखने को कहा गया है।

संबंधित क्षेत्र को लोगों को भी अनावश्यक नदी के निकट नहीं जाने तथा सतर्क और सुरक्षित रहने का सुझाव दिया गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा नावों के परिचालन पर निगरानी रखने, ओवरलोडिंग को रोकने तथा लोगों को निरंतर सूचना उपलब्ध कराते हुए जागरूक रखने का निर्देश दिया गया है।

उधर, गंगा नदी के विभिन्न स्थानों पर लगातार बढ़ते जलस्तर तथा सहायक नदियों में बैकवाटर के संभावित प्रभाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह द्वारा विभागीय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील तटबंधों, स्थलों, स्लुइस गेटों एवं निचले क्षेत्रों में रात्रि गश्ती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित करते हुए कहा कि सभी संवेदनशील स्थलों पर रात्रि पेट्रोलिंग एवं सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। तटबंधों एवं अन्य संरचनाओं पर सीपेज, ओवरटॉपिंग, कटाव, रिसाव अथवा किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए।

साथ ही, किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल वरीय अधिकारियों को दी जाए तथा बिना किसी विलंब के प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वहीं, रात्रि के दौरान सभी संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त मानव बल, प्रकाश एवं संचार व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह भी कहा गया है कि सभी क्षेत्रीय पदाधिकारी विशेषकर महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील स्थलों पर पूरी रात्रि सतर्क एवं उपलब्ध रहें।