ममता बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टी मुखर्जी का शव फंदे से लटका मिला; भर्ती घोटाले में गई थी नौकरी, दो साल से डिप्रेशन में थीं
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चचेरे भाई और तृणमूल कांग्रेस नेता निहार मुखर्जी की बेटी ब्रिष्टी मुखर्जी का शव मंगलवार सुबह बीरभूम जिले के कुसुंबा स्थित उनके पैतृक आवास की पहली मंजिल के कमरे में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। परिजनों के अनुसार शिक्षक भर्ती घोटाले में नौकरी जाने के बाद से ही ब्रिष्टी पिछले दो सालों से डिप्रेशन में थीं।
DESWA DESK : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चचेरे भाई और तृणमूल कांग्रेस नेता निहार मुखर्जी की बेटी ब्रिष्टी मुखर्जी का शव मंगलवार सुबह बीरभूम जिले के कुसुंबा स्थित उनके पैतृक आवास की पहली मंजिल के कमरे में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। परिजनों के अनुसार शिक्षक भर्ती घोटाले में नौकरी जाने के बाद से ही ब्रिष्टी पिछले दो सालों से डिप्रेशन में थीं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मंगलवार सुबह जब काफी देर तक ब्रिष्टी अपने कमरे से बाहर नहीं आईं तो परिजनों ने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर दरवाजा तोड़ा गया जहां उनका शव पंखे से लटका मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बोलपुर उपमंडल अस्पताल भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि ब्रिष्टी मुखर्जी बोलपुर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं।
राज्य में वर्ष 2016 में हुए स्टेट लेवल सिलेक्शन टेस्ट (एसएलसीटी) के तहत उनकी नियुक्ति हुई थी। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा 22 अप्रैल 2024 को भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के चलते 25753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नौकरियां रद्द कर दी गई थीं।
अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि अवैध रूप से काम कर रहे कर्मचारियों को अपनी सैलरी ब्याज समेत वापस करनी होगी। नौकरी जाने और वित्तीय-सामाजिक दबाव के चलते ब्रिष्टी मानसिक तनाव में रहने लगी थीं। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में नई प्रक्रिया पूरी होने तक योग्य शिक्षकों को पढ़ाना जारी रखने की राहत दी थी, लेकिन मानसिक अवसाद से वह उबर नहीं सकीं थीं।
पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016 की शिक्षक भर्ती परीक्षा (एसएलसीटी) में लगभग 24640 रिक्त पदों के लिए 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। आरोप है कि योग्य अभ्यर्थियों को किनारे कर पांच से 15 लाख रुपये तक की रिश्वत लेकर नौकरियां बांटी गईं। इस मामले की सीबीआई जांच के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी समेत स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।













