बिहार के पूर्व राज्यपाल डॉ. डीवाई पाटिल का 90 वर्ष की आयु में निधन, देश ने खोया महान शिक्षाविद् और समाजसेवक
बिहार के पूर्व राज्यपाल, प्रख्यात शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल (डीवाई पाटिल) का मंगलवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उन्होंने नवी मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। डॉ. डीवाई पाटिल के निधन की खबर मिलते ही देश के राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री सहित देश की प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
DESWA DESK : बिहार के पूर्व राज्यपाल, प्रख्यात शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल (डीवाई पाटिल) का मंगलवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उन्होंने नवी मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। डॉ. डीवाई पाटिल के निधन की खबर मिलते ही देश के राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री सहित देश की प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
22 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में उनका जन्म हुआ था। मार्च 2013 से नवंबर 2014 तक वे बिहार के राज्यपाल रहे। वे डॉ. डीवाई पाटिल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक थे। उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। डॉ. डी. वाई. पाटिल ने 22 मार्च 2013 से 26 नवंबर 2014 तक बिहार के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और विश्वविद्यालयों के अकादमिक सत्र को नियमित करने पर विशेष जोर दिया। वे एक ऐसे राजनेता और राज्यपाल के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने हमेशा दलीय राजनीति से ऊपर उठकर जन कल्याण और शिक्षा के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता दी।
बिहार में अपने कार्यकाल के दौरान वे आम जनता और विद्यार्थियों के लिए बेहद सहजता से उपलब्ध रहते थे। राजभवन के दरवाजे उन्होंने हमेशा शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े लोगों के लिए खुले रखे। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्मे डॉ. डीवाई पाटिल का मुख्य योगदान शिक्षा के क्षेत्र में है। उन्होंने 1980 के दशक में महसूस किया कि देश को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी और मेडिकल शिक्षा की सख्त जरूरत है। इसके बाद उन्होंने डीवाई पाटिल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस' की स्थापना की, जिसके तहत आज देशभर में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग संस्थान, डीम्ड यूनिवर्सिटीज और स्कूल संचालित हो रहे हैं। युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार देने के कारण उन्हें शिक्षा जगत का भीष्म पितामह कहा जाता था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाजा था।













