अब संगीन मामलों के अपराधियों का बचना मुश्किल, पुलिस मुख्यालय का सभी एसपी को कड़ा निर्देश, आर्म्स एक्ट के मामलों में ...?

पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि इन गंभीर कांडों की जांच, साक्ष्य संकलन और समय पर चार्जशीट दाखिल करने में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक इन पांच श्रेणियों के गंभीर मामलों को अनिवार्य रूप से स्पीडी ट्रायल के दायरे में लाया जाएगा।

अब संगीन मामलों के अपराधियों का बचना मुश्किल, पुलिस मुख्यालय का सभी एसपी को कड़ा निर्देश, आर्म्स एक्ट के मामलों में ...?

DESWA DESK : राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रखने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। मुख्यालय ने राज्य के सभी जिला एसपी को पांच विशेष श्रेणियों के गंभीर अपराधों पर मिशन मोड में फोकस करने का कड़ा निर्देश दिया है। इन पांच अपराधों में हत्या व दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध, पुलिस टीम पर हमला, सांप्रदायिक घटनाएं, हर्ष फायरिंग और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं।

पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि इन गंभीर कांडों की जांच, साक्ष्य संकलन और समय पर चार्जशीट दाखिल करने में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक इन पांच श्रेणियों के गंभीर मामलों को अनिवार्य रूप से स्पीडी ट्रायल के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए जिला पुलिस कप्तानों को कोर्ट के साथ बेहतर समन्वय बनाने को कहा गया है ताकि अदालतों में सुनवाई तेज हो और अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इस कदम से जहां एक ओर पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और समाज में एक सख्त संदेश जाएगा।

हाल के दिनों में युवाओं द्वारा सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन (रील और फोटो) का चलन बढ़ा है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने आर्म्स एक्ट और हर्ष फायरिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। फरार आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, केवल शूटर या आरोपी ही नहीं, बल्कि हथियारों की सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क और सिंडिकेट की पड़ताल की जाएगी। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि चिह्नित किए गए इन पांच गंभीर अपराधों पर समयबद्ध और सख्त कार्रवाई से आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत होगा। कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षकों को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है, ताकि किसी भी शरारती तत्व को माहौल बिगाड़ने का मौका न मिले। इस पूरे एक्शन प्लान की पारदर्शिता और गति बनाए रखने के लिए प्रत्येक जिले को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी होगी, जहां उच्च अधिकारियों के स्तर पर इसकी सीधी मॉनिटरिंग की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) निगरानी ब्यूरो और एसटीएफ जैसी विशेष एजेंसियां अपने स्तर पर लगातार अभियान चलाकर बड़े अपराधों पर अंकुश लगा रही हैं। ऐसे में अब जिला पुलिस अधीक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि वे थानों में दर्ज गंभीर कांडों के पर्यवेक्षण और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने पर अपना पूरा फोकस केंद्रित करें।