सीएम सम्राट चौधरी पर आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह का विवादित बयान, बोले- अगर पूर्व की सरकार में एनकाउंटर हो गया होता तो..?
बिहार की सियासत में बयानों के तीर एक बार फिर मर्यादा की सीमा लांघते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित बयान दिया है। सांसद ने सीधे तौर पर कहा है कि यदि पूर्व की सरकार के समय सम्राट चौधरी का एनकाउंटर हो गया होता, तो आज वह बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर नहीं होते।
DESWA DESK : बिहार की सियासत में बयानों के तीर एक बार फिर मर्यादा की सीमा लांघते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित बयान दिया है। सांसद ने सीधे तौर पर कहा है कि यदि पूर्व की सरकार के समय सम्राट चौधरी का एनकाउंटर हो गया होता, तो आज वह बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर नहीं होते।
सुधाकर सिंह के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है और एनडीए खेमे ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री पर अतीत के कई गंभीर मामलों का हवाला देते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी पर हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे कई गंभीर आरोप रहे हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कभी बदले की भावना से काम नहीं किया। लालू यादव राजनीति के असली नायक हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सम्राट चौधरी की नजर में लालू यादव सिर्फ इसलिए 'खलनायक' बने हुए हैं क्योंकि लालू यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए उनका एनकाउंटर नहीं करवाया। अगर उस दौर में कानून-व्यवस्था के नाम पर उनका एनकाउंटर करा दिया गया होता, तो आज वे इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाते। बिहार की राजनीति में पहली बार मौजूदा मुख्यमंत्री के संदर्भ में 'एनकाउंटर' जैसे शब्द का इस्तेमाल किसी मौजूदा सांसद द्वारा किया गया है।
आरजेडी ने दावा किया कि उनके शासनकाल में विपक्ष के नेताओं को निशाना नहीं बनाया गया, जबकि मौजूदा सरकार केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का डर दिखाती है। सुधाकर सिंह के इस बयान के सामने आते ही भाजपा और जदयू ने आरजेडी पर पलटवार किया है। एनडीए प्रवक्ताओं का कहना है कि आरजेडी सांसद का यह बयान उनकी हताशा और 'जंगलराज' वाली मानसिकता को दर्शाता है। लोकतंत्र में मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ऐसी हिंसक भाषा का प्रयोग बेहद निंदनीय है। आने वाले दिनों में यह विवाद सदन से लेकर सड़क तक और गहरा सकता है।













