पटना में एशिया का सबसे बड़ा आधुनिक श्मशान, बांसघाट पर एक साथ होगा 18 शवों का अंतिम संस्कार, कैंटीन और एसी वेटिंग हॉल भी
बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले बांसघाट ने अब एक नया स्वरूप ले लिया है। एशिया के सबसे बड़े और आधुनिक श्मशान घाट के रूप में पुनर्विकसित किए गए बांसघाट महाप्रयाण स्थल का विधिवत संचालन शुरू हो गया है। गंगा नदी के किनारे स्थित इस नए परिसर में अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं का ऐसा समावेश किया गया है, जो पूरे देश में मिसाल है। अब यहां एक साथ 18 शवों का पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जा सकेगा, जिससे परिजनों को लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी।
DESWA DESK : बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले बांसघाट ने अब एक नया स्वरूप ले लिया है। एशिया के सबसे बड़े और आधुनिक श्मशान घाट के रूप में पुनर्विकसित किए गए बांसघाट महाप्रयाण स्थल का विधिवत संचालन शुरू हो गया है। गंगा नदी के किनारे स्थित इस नए परिसर में अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं का ऐसा समावेश किया गया है, जो पूरे देश में मिसाल है। अब यहां एक साथ 18 शवों का पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जा सकेगा, जिससे परिजनों को लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी।
आमतौर पर श्मशान घाटों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार और नगर निगम ने इसे एक आधुनिक परिसर के रूप में ढाला है। शवदाह की प्रक्रिया पूरी होने तक परिजनों और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के बैठने के लिए पूरी तरह वातानुकूलित प्रतीक्षालय बनाया गया है। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए परिसर में ही शुद्ध पेयजल और खान-पान की व्यवस्था के लिए एक कैंटीन शुरू की गई है।
पारंपरिक लकड़ी आधारित शवदाह गृहों के अलावा यहां गैस और विद्युत शवदाह की आधुनिक प्रणालियां लगाई गई हैं, जो कम से कम प्रदूषण फैलाती हैं। पटना नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, बांसघाट पर न केवल पटना बल्कि आस-पास के कई जिलों से लोग शवदाह के लिए आते हैं। बाढ़ या महामारी के समय यहां जगह कम पड़ने के कारण लोगों को कई-कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। अब 18 नए शवदाह प्लेटफार्म (चबूतरे) चालू हो जाने से क्षमता कई गुना बढ़ गई है। परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए लैंडस्केपिंग और पार्क भी विकसित किए गए हैं, ताकि वहां का माहौल शांत और गरिमामय बना रहे। घाट का संचालन शुरू हो गया है।













