बांकीपुर उपचुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी का अंदरूनी कलह सतह पर; भाई वीरेंद्र बोले-कच्चा-चिट्ठा खोल दूंगा तो शक्ति यादव...?

शक्ति यादव की टिप्पणी से भड़के भाई वीरेंद्र ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने शक्ति यादव के राजनीतिक अनुभव पर हमला बोलते हुए कहा कि भाई वीरेंद्र लोकदल के जमाने का आदमी है। जब राजनीति में तुम्हारी पैदाइश भी नहीं थी, तब से भाई वीरेंद्र राजनीति कर रहा है। 2010 से विधायक हूं, दौर बदले, लोग बदले, लेकिन भाई वीरेंद्र नहीं बदला। विधायक ने आगे आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेता तेजस्वी यादव के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजनीति कर रहा हूं, और तुम जैसे लोग तेजस्वी यादव का चेहरा दिखाकर लोगों से माल वसूलने का काम करते हो। अगर तुम्हारी करतूतों को सार्वजनिक कर दूंगा, तो मुंह दिखाने के लायक नहीं रहोगे। इसलिए शांत ही रहो।

बांकीपुर उपचुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी का अंदरूनी कलह सतह पर; भाई वीरेंद्र बोले-कच्चा-चिट्ठा खोल दूंगा तो शक्ति यादव...?

DESWA DESK : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर छिड़ा अंदरूनी घमासान अब सार्वजनिक हो चुका है। हार की जवाबदेही को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब व्यक्तिगत हमलों, गंभीर आरोपों और राजनीतिक वजूद की लड़ाई में तब्दील हो गई है। मनेर से आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के बीच जारी इस तल्खी ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के करीबियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपचुनाव के नतीजों के तुरंत बाद मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट किया कि यह हार पार्टी संगठन की नाकामी नहीं है, बल्कि उन नेताओं का नतीजा है जिन पर पार्टी अंधा भरोसा करती है, लेकिन धरातल पर उनका कोई जनाधार या वजूद नहीं है। भाई वीरेंद्र के इस बयान पर आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने भाई वीरेंद्र की वफादारी और योगदान पर सवाल उठाते हुए पूछ दिया कि भाई वीरेंद्र ने आखिरकार पार्टी के लिए क्या किया है? 

शक्ति यादव की टिप्पणी से भड़के भाई वीरेंद्र ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने शक्ति यादव के राजनीतिक अनुभव पर हमला बोलते हुए कहा कि भाई वीरेंद्र लोकदल के जमाने का आदमी है। जब राजनीति में तुम्हारी पैदाइश भी नहीं थी, तब से भाई वीरेंद्र राजनीति कर रहा है। 2010 से विधायक हूं, दौर बदले, लोग बदले, लेकिन भाई वीरेंद्र नहीं बदला। विधायक ने आगे आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेता तेजस्वी यादव के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजनीति कर रहा हूं, और तुम जैसे लोग तेजस्वी यादव का चेहरा दिखाकर लोगों से माल वसूलने का काम करते हो। अगर तुम्हारी करतूतों को सार्वजनिक कर दूंगा, तो मुंह दिखाने के लायक नहीं रहोगे। इसलिए शांत ही रहो।

बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। भाई वीरेंद्र ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए पार्टी के अंदर सक्रिय कुछ गुटों पर मर्यादा की तमाम सीमाएं पार करते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव हमारे आदरणीय नेता हैं और उन्होंने तेजस्वी यादव को ताज सौंपा है, इसलिए तेजस्वी हमारे नेता हैं। मैं लालू-तेजस्वी का आदमी हूं, किसी ऐसे-वैसे का नहीं। मैं ऐसे लोगों का आदमी नहीं हो सकता जो 'जिंदा चमड़े की सप्लाई' करते हैं। वो संभल जाएं, वरना उनका सारा कच्चा-चिट्ठा मेरे पास है। खोल दूंगा तो कहीं के नहीं रहोगे।

तुम क्या राजनीति करते थे, सब जानता हूं। किनके साथ क्या किया, घर से क्यों भागे थे और कितने सालों बाद घर लौटे, यह भी मुझे अच्छे से पता है। इसलिए अपनी हैसियत और होश-हवास में रहो। बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आरजेडी के लिए केवल एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से उबल रहे असंतोष का विस्फोट बनकर सामने आया है। वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा प्रवक्ता शक्ति यादव पर लगाए गए 'माल वसूली' और 'चरित्र' से जुड़े गंभीर आरोपों ने विपक्ष को बैठा-बिठाया मुद्दा दे दिया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए क्या सख्त कदम उठाते हैं।