मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की गुपचुप तैयारी : धर्मेंद्र प्रधान पर गिर सकती है गाज, नीतीश कुमार और राघव चड्ढा को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी तारीख या नामों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग हुई मुलाकातों के बाद इन अटकलों को बल मिला है।

मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की गुपचुप तैयारी : धर्मेंद्र प्रधान पर गिर सकती है गाज, नीतीश कुमार और राघव चड्ढा को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी!

DESWA DESK : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी तारीख या नामों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग हुई मुलाकातों के बाद इन अटकलों को बल मिला है। सूत्रों का दावा है कि इस बार कई कद्दावर मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि कुछ नए और चौंकाने वाले चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है।

इस संभावित फेरबदल में सबसे बड़ा नाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का सामने आ रहा है। देश में हाल ही में हुए पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधान लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि विवादों के चलते धर्मेंद्र प्रधान पर गाज गिर सकती है और उनकी जगह किसी नए चेहरे को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी जा सकती है। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन और पेट्रोलियम जैसे भारी-भरकम विभाग संभाल रहे हरदीप सिंह पुरी की जगह पंजाब या सिख समुदाय से किसी अन्य बड़े नेता को शामिल कर समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है।

चर्चाएं केवल मंत्रियों को हटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मोदी सरकार के 'कोर ग्रुप' के विभागों में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। सूत्रों के मुताबिकनिर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री), नितिन गडकरी (सड़क परिवहन मंत्री) और मनोहर लाल खट्टर (ऊर्जा व शहरी विकास मंत्री) के विभागों को बदला जा सकता है। सरकार इसके जरिए आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और 2029 के रोडमैप को ध्यान में रखकर मंत्रालयों को नया विजन देना चाहती है।

गठबंधन सहयोगियों को साधने और नए राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए इस फेरबदल में कुछ नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केंद्रीय कैबिनेट में अहम पोर्टफोलियो दिया जा सकता है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे को भी केंद्रीय कैबिनेट  में शामिल किया जा सकता है। हाल ही में आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। चर्चा है कि उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, हालांकि राघव चड्ढा ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल से भी बड़े नाम रेस में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केंद्र में बड़ी और सम्मानजनक भूमिका दी जा सकती है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अनुभवी नेता सुखेंदु शेखर रे को भी मोदी कैबिनेट में शामिल कर पश्चिम बंगाल के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है। भले ही सियासी गलियारों में इन नामों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) या सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस सस्पेंस से पर्दा उठ सकता है।