आचार संहिता का पेंच या अधूरी तैयारी? राहुल गांधी का पटना दौरा और छात्र सम्मेलन स्थगित

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का पटना दौरा फिलहाल रद्द कर दिया गया है। 15 जुलाई को होने वाला छात्र सम्मेलन भी अब आयोजित नहीं होगा। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस कार्यक्रम के टलने की आधिकारिक वजह बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर लागू आदर्श आचार संहिता को बताया है। हालांकि, इस राजनीतिक स्थगन के पीछे कांग्रेस के भीतर सांगठनिक कमियों और अधूरी तैयारियों की भी चर्चा है।

आचार संहिता का पेंच या अधूरी तैयारी? राहुल गांधी का पटना दौरा और छात्र सम्मेलन स्थगित

DESWA DESK : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का पटना दौरा फिलहाल रद्द कर दिया गया है। 15 जुलाई को होने वाला छात्र सम्मेलन भी अब आयोजित नहीं होगा। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस कार्यक्रम के टलने की आधिकारिक वजह बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर लागू आदर्श आचार संहिता को बताया है। हालांकि, इस राजनीतिक स्थगन के पीछे कांग्रेस के भीतर सांगठनिक कमियों और अधूरी तैयारियों की भी चर्चा है।

कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस समय उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पूरे क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चूंकि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं और उनके कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद थी, इसलिए किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन से चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का खतरा था। कानूनी और चुनावी पेचीदगियों से बचने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने इस दौरे को फिलहाल स्थगित करना ही बेहतर समझा।

यह पहला मौका नहीं है जब इस कार्यक्रम के शेड्यूल में बदलाव किया गया हो। शुरुआत में यह छात्र सम्मेलन 11 जुलाई को होना तय हुआ था। बाद में रणनीतिक कारणों से इसकी तारीख बढ़ाकर 15 जुलाई की गई और अब इसे पूरी तरह टाल दिया गया है। फिलहाल, प्रदेश कांग्रेस ने नई तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। भले ही कांग्रेस ऑन-रिकॉर्ड आचार संहिता को ढाल बना रही हो, लेकिन पार्टी गलियारों में सुगबुगाहट कुछ और ही है। सूत्रों के मुताबिक इस बड़े आयोजन के लिए जो सांगठनिक तैयारियां होनी चाहिए थीं, वे समय पर पूरी नहीं हो सकीथी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस संगठन को नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक व धांधली से प्रभावित करीब दस हजार छात्रों का डेटाबेस तैयार करने का लक्ष्य दिया गया था।राहुल गांधी इन छात्रों से सीधा संवाद करने वाले थे, लेकिन तय समय तक प्रभावित छात्रों और युवाओं की सूची मुकम्मल नहीं हो पाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिना ठोस जमीन और डेटा के राहुल गांधी के सामने खाली कुर्सियां पार्टी के लिए किरकिरी का सबब बन सकती थी, जिसे भांपते हुए यह कदम उठाया गया।