फाइनेंसरों की दादागिरी पर शिकंजा : बिना कानूनी प्रक्रिया गाड़ी खींची तो एफआईआर,परिवहन सचिव का सख्त आदेश-सीधे भेजें जेल
कर्ज यानी ईएमआई न चुकाने पर वाहन मालिकों को डरा-धमकाकर सड़क पर गाड़ी रोकने और जबरन उसे जब्त करने वाले फाइनेंसरों और उनके पाले हुए गुंडों (रिकवरी एजेंटों) की अब खैर नहीं है। परिवहन विभाग के सचिव ने सूबे के सभी डीएम और एसपी को नया दिशानिर्देश जारी किया है।
DESWA DESK : कर्ज यानी ईएमआई न चुकाने पर वाहन मालिकों को डरा-धमकाकर सड़क पर गाड़ी रोकने और जबरन उसे जब्त करने वाले फाइनेंसरों और उनके पाले हुए गुंडों (रिकवरी एजेंटों) की अब खैर नहीं है। परिवहन विभाग के सचिव ने सूबे के सभी डीएम और एसपी को नया दिशानिर्देश जारी किया है। नए आदेश के तहत, अगर कोई भी फाइनेंसर या उसकी एजेंसी बिना किसी कानूनी वारंट या जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति के किसी की गाड़ी जबरन सड़क पर रोकती या उठाती है, तो उसपर सीधे मुकदमा दर्ज किया जाएगा। डीएम और एसपी खुद ऐसी मनमानी करने वाली कंपनियों और उनके गुंडों पर सीधे कानूनी चाबुक चलाएंगे।
दरअसल, पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट गुंडागर्दी पर उतारू हैं। वे बीच सड़क पर महिलाओं, परिवारों या व्यावसायिक वाहनों को जबरन रोककर चाबी छीन लेते हैं और मारपीट करते हैं। हाल ही में उच्च न्यायालय ने भी इसपर बेहद सख्त टिप्पणी की थी, जिसके बाद परिवहन विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। सचिव के नए आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि फाइनेंस कंपनियों के अपने नियम देश के कानून और मानवाधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते।
परिवहन विभाग के नए आदेश के मुताबिक अब कोई भी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी सीधे अपने स्तर पर गाड़ी जब्त नहीं कर सकती। उन्हें एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। वाहन मालिक को डिफ़ॉल्ट होने पर पहले कानूनी नोटिस देना होगा। गाड़ी को जब्त करने से पहले स्थानीय जिला प्रशासन (डीएम कार्यालय) और संबंधित थाने को लिखित रूप में सूचित करना होगा। साथ ही, जब्ती प्रक्रिया के दौरान कंपनी के पास वैध पहचान पत्र होना चाहिए और पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य होगी। किसी भी हाल में चलती गाड़ी को बीच सड़क पर रोककर यात्रियों को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।
परिवहन सचिव ने कहा है कि कोई भी निजी संस्थान या बैंक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। यदि कोई रिकवरी एजेंट किसी वाहन मालिक के साथ बदसलूकी करता है या जबरन गाड़ी खींचता है, तो पीड़ित तुरंत नजदीकी थाने या डीएम-एसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। ऐसे तत्वों पर गैंगस्टर एक्ट और रंगदारी के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जैसे ही किसी वाहन मालिक की तरफ से जबरन गाड़ी छीनने की शिकायत मिले, बिना किसी देरी के फाइनेंसर और उसके रिकवरी एजेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।













