211 प्रखंडों में नहीं है डिग्री कॉलेज, जमीन दान देने वालों के नाम पर होगा महाविद्यालय, जानिए क्या है प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में महाविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि दान देने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर उस महाविद्यालय का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में डिग्री की पढ़ाई शुरू कराएं।
DESWA DESK : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के 211 प्रखंडों में शीघ्र ही डिग्री कॉलेज खोलने का निर्देश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए समय-सीमा भी तय कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि एक जुलाई से डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में डिग्री की पढ़ाई शुरू कराएं। यानी कि इन प्रखंडों में स्नातक तक की शिक्षा के लिए एक जुलाई से बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में महाविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि दान देने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर उस महाविद्यालय का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में डिग्री की पढ़ाई शुरू कराएं। 211 डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में नए महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है, उनमें बहाली के लिए कमिटी का शीघ्र गठन कर वैकेंसी को एक साथ अटैच करें।
वित्तरहित महाविद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर, भवन, अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या और दी जाने वाली अनुदान राशि का आंकलन करें। डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में महाविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि दान देने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर उस महाविद्यालय का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में भवन निर्माण के साथ ही आंशिक रूप से सहयोग करने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर भी महाविद्यालय परिसर के किसी हिस्से का नामकरण कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में स्थापित महाविद्यालयों को संबद्ध करने के लिए हिंदुस्तान के टॉप-10 विश्वविद्यालयों से एमओयू साइन करें ताकि बाहर से भी बिहार आकर बच्चे शिक्षा हासिल कर सकें। सभी डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में स्थापित होने वाले महाविद्यालय ऐसी जगह पर हों जहां विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो तथा सुगमतापूर्वक आवागमन हो सके। विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित करने के लिए भारत सरकार को शीघ्र जमीन हैंडओवर किया जाएगा।











