बिहार में क्राइम कंट्रोल पर एक्शन मोड में CM सम्राट, CCTV निगरानी से लेकर 30 दिन में शिकायत निपटारे तक बड़े आदेश
बिहार में बढ़ते अपराध और सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते...
बिहार में बढ़ते अपराध और सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्यभर में आईटी विभाग की मदद से CCTV कैमरे लगाए
‘सहयोग पोर्टल’ के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यभर में आईटी विभाग की मदद से CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि थाना और अंचल स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सके। उन्होंने कहा कि कौन थाना चला रहा है और किस स्तर पर काम हो रहा है, अब हर चीज पर सरकार की नजर रहेगी।
DM और SP को निर्देश
मुख्यमंत्री ने सभी DM और SP को निर्देश देते हुए कहा कि वे बिना पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण करें और हर हाल में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में इन दिनों सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है।
लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान
इस दौरान सरकार ने आम लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए नई डिजिटल व्यवस्था भी शुरू की। अब लोग sahyog.bihar.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे। साथ ही ‘सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100’ भी लॉन्च किया गया है, जो सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक सक्रिय रहेगा। इसके माध्यम से राज्य का कोई भी नागरिक अपनी समस्या दर्ज करा सकेगा।
शिकायतों के समाधान की कोशिश
सरकार की नई व्यवस्था के तहत हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को ‘सहयोग शिविर’ लगाया जाएगा, जहां मौके पर ही शिकायतों के समाधान की कोशिश की जाएगी। इतना ही नहीं, दर्ज शिकायतों के निपटारे के लिए 30 दिनों की समय सीमा तय की गई है। समस्या के समाधान के बाद आवेदक को लिखित रूप से जानकारी भी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इस नई पहल से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।













