आस्था, तप और सूर्य उपासना का महापर्व—चैती छठ 22 मार्च से शुरू

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की आस्था का सबसे पवित्र और अनुशासित पर्व—चैती छठ—इस वर्ष 22 मार्च से आरंभ हो रहा है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के जरिए प्रकृति, जल और ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अद्भुत अवसर है। छठ पूजा की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती,....

आस्था, तप और सूर्य उपासना का महापर्व—चैती छठ 22 मार्च से शुरू

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की आस्था का सबसे पवित्र और अनुशासित पर्व—चैती छठ—इस वर्ष 22 मार्च से आरंभ हो रहा है। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के जरिए प्रकृति, जल और ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अद्भुत अवसर है। छठ पूजा की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि सीधे सूर्य देव और प्रकृति की आराधना की जाती है।

पहला दिन  नहाय- खाय से शुरू
छठ पर्व का पहला दिन (22 मार्च ) नहाय- खाय से शुरू होगा। पर्व की शुरुआत शुद्धता और सात्विकता के साथ होती है। व्रती पवित्र स्नान कर कद्दू की सब्जी, चना दाल और भात का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस दिन से घर में शुद्धता के विशेष नियमों का पालन शुरू हो जाता है। वहीं दूसरा दिन खरना (23 मार्च) मनाया जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को विधि-विधान से पूजा के बाद गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

नदियों और तालाबों के घाटों पर भव्य दृश्य
छठ पर्व के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य (24 मार्च) दिया गाएगा। इस दिन व्रती अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। घाटों पर दीपों की रोशनी, लोकगीतों की गूंज और श्रद्धालुओं की भीड़ से अद्भुत आध्यात्मिक माहौल बनता है।  नदियों और तालाबों के घाटों पर भव्य दृश्य देखने को मिलता है, जहां दीप, फूल और लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। वहीं चौथा दिन प्रातः अर्घ्य (25 मार्च) में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।  व्रती परिवार की सुख-समृद्धि और संतानों की लंबी आयु की कामना करते हैं।

छठ पूजा की प्रमुख सामग्रियां
बता दें कि छठ पर्व में अर्पित की जाने वाली सामग्रियों का विशेष महत्व होता है। इसमें ठेकुआ, कसार, चावल के लड्डू, गुड़, फल (केला, नारियल, सेब), गन्ना, अदरक, हल्दी और सुप शामिल होते हैं। बांस के दउरा और सूप में इन प्रसादों को सजाकर अर्पित किया जाता है। चैती छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और सूर्य ऊर्जा के प्रति आभार प्रकट करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। कठोर नियम, अटूट श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता छठ पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई और आध्यात्मिकता का जीवंत उदाहरण है।