गोपालगंज में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई, भ्रष्टाचार के आरोप में पंचायत सचिव बर्खास्त
बिहार के गोपालगंज जिले से भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने पंचायत सचिव अभय ....
बिहार के गोपालगंज जिले से भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने पंचायत सचिव अभय कुमार गुप्ता को सरकारी सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इस फैसले के बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और सरकारी विभागों में सख्त संदेश गया है कि भ्रष्टाचार पर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
सरकारी योजनाओं की राशि के उपयोग में भारी अनियमितता
जानकारी के अनुसार, भोरे प्रखंड के बीडीओ द्वारा पंचायत सचिव अभय कुमार गुप्ता के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। आरोप था कि उन्होंने सरकारी योजनाओं की राशि के उपयोग में भारी अनियमितता की, पंचायत सरकार भवन निर्माण के बाद मजदूरों के भुगतान में गड़बड़ी की और मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना के क्रियान्वयन में भी लापरवाही बरती। इसके अलावा बिना सूचना लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रहने की शिकायत भी सामने आई थी।
अभय कुमार गुप्ता को निलंबित किया
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले अभय कुमार गुप्ता को निलंबित किया और विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट में कई आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा में आरोपों को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।
सरकारी विभागों में भी हलचल तेज
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, लापरवाही और वित्तीय अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों में और भी सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं में गड़बड़ी और भुगतान में अनियमितता की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई आम लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने वाली मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के दायरे में आने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी क्या कार्रवाई होती है।













