गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह, सम्राट सरकार की नई टीम आज होगी तैयार
पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज बिहार की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजधानी में सियासी हलचल तेज है। शपथ ग्रहण समारोह की सभी ...
पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आज बिहार की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजधानी में सियासी हलचल तेज है। शपथ ग्रहण समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी।
सम्राट सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 34 तक पहुंच सकती है
सूत्रों के मुताबिक देर रात कई विधायकों को फोन कर शपथ समारोह में शामिल होने की सूचना दी गई। भाजपा और जदयू अपने-अपने कोटे से फिलहाल एक-एक सीट खाली रख सकते हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा के 14 और जदयू के 13 नेता मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत सम्राट सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 34 तक पहुंच सकती है।भाजपा कोटे से जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें राम कृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, मिथलेश तिवारी, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल और लखविंदर पासवान समेत कई नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर
वहीं जदयू खेमे में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर है। जानकारी के अनुसार उन्हें भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फोन किया गया है। जदयू की संभावित सूची में श्रवण कुमार, मदन सहनी, लेसी सिंह, अशोक चौधरी और जमा खान जैसे नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
हजारों कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना
एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से संजय पासवान और संजय सिंह के नाम चर्चा में हैं, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष सुमन और आरएलएम की ओर से दीपक प्रकाश को मंत्री पद मिल सकता है।गांधी मैदान में होने वाले इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के कई बड़े नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मंच सज्जा तक सभी तैयारियां हो चुकी हैं। बिहार की राजनीति के लिए यह समारोह बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी के साथ सम्राट सरकार की नई टीम और आगामी राजनीतिक रणनीति की तस्वीर भी साफ होगी।













