बिहार में बदला सत्ता का प्रतीक—‘1 अण्णे मार्ग’ अब ‘लोक सेवक आवास’
बिहार की राजनीति में बदलाव की बयार अब साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। सत्ता संभालते ही सम्राट चौधरी ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि शासन की सोच और....
बिहार की राजनीति में बदलाव की बयार अब साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। सत्ता संभालते ही सम्राट चौधरी ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि शासन की सोच और संदेश को भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री आवास ‘1 अण्णे मार्ग’ का नाम अब बदलकर “लोक सेवक आवास” कर दिया गया है।राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, पटना स्थित मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास अब सभी सरकारी कार्यों के लिए “लोक सेवक आवास” के नाम से जाना जाएगा।
सत्ता में बैठा व्यक्ति जनता का सेवक होता है
बता दें कि करीब दो दशकों तक नीतीश कुमार इस आवास में मुख्यमंत्री रहे।बीच में कुछ समय के लिए जीतन राम मांझी ने भी यहां से कार्यभार संभाला।अब नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट हो चुके हैं और अब 1 अण्णे मार्ग मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को अलॉट कर दिया गया है। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मानना है कि सत्ता में बैठा व्यक्ति जनता का सेवक होता है।इसी सोच को मजबूत करने के लिए ‘मुख्यमंत्री आवास’ का नाम बदलकर ‘लोक सेवक आवास’ रखा गया है ताकि सत्ता और जनसेवा के बीच का सीधा जुड़ाव बना रहे।
शासन की कार्यशैली और प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत
बता दें कि यह निर्णय केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली और प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।बिहार में नई सरकार का यह कदम साफ करता है कि अब राजनीति में प्रतीकों के जरिए भी जनता से जुड़ाव दिखाने की कोशिश की जा रही है
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