मौरंग वसूली गैंग मामला: STF केस के बाद एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में मचे भ्रष्टाचार के शोर के बीच आखिरकार कार्रवाई की गाज गिर ही गई। मौरंग परिवहन में अवैध वसूली और संगठित गैंग के आरोपों में घिरी फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम को निलंबित कर दिया गया है। एसटीएफ लखनऊ की एफआईआर के 48 दिन बाद हुई इस कार्रवाई ने विभागीय सुस्ती और जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े....

मौरंग वसूली गैंग मामला: STF केस के बाद एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में मचे भ्रष्टाचार के शोर के बीच आखिरकार कार्रवाई की गाज गिर ही गई। मौरंग परिवहन में अवैध वसूली और संगठित गैंग के आरोपों में घिरी फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम को निलंबित कर दिया गया है। एसटीएफ लखनऊ की एफआईआर के 48 दिन बाद हुई इस कार्रवाई ने विभागीय सुस्ती और जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मौरंग वसूली गैंग से जुड़ा है मामला
एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम के खिलाफ 12 नवंबर को रायबरेली जिले के लालगंज थाने में एसटीएफ लखनऊ द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुकदमे में मौरंग परिवहन के नाम पर गैंग बनाकर अवैध वसूली, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 नवंबर को परिवहन आयुक्त ने एआरटीओ के निलंबन की संस्तुति विशेष सचिव परिवहन को भेजी थी। अब विशेष सचिव ने न केवल निलंबन का आदेश जारी किया है, बल्कि अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।इस मामले की विभागीय जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त मयंक ज्योति को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

11 लोग नामजद, चालक फरार
बता दें कि लालगंज थाने में दर्ज मुकदमे में कुल 11 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा गौतम उनके चालक सिकंदर ,पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी पीटीओ के चालक अशोक तिवारी शामिल हैं। जानकारी के लिए बता दें कि पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी को रिटायरमेंट से एक दिन पहले निलंबित कर दिया गया था, जबकि दोनों चालक अब तक फरार बताए जा रहे हैं।

मेडिकल अवकाश से लेकर जॉइनिंग तक
अब मुकदमा दर्ज होने के 48 दिन बाद एआरटीओ पर कार्रवाई की गई है।दरअसल मुकदमे में नामजद होने के बाद एआरटीओ 13 नवंबर को मेडिकल अवकाश पर चली गई थीं। बाद में हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद 28 नवंबर को उन्होंने दोबारा फतेहपुर में जॉइन कर कार्यभार संभाल लिया था और तब से लगातार ड्यूटी पर थीं।इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर परिवहन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 48 दिन बाद हुई कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की रफ्तार अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।