किन्नरों के विवाद में महिला को लगी गोली, एक लाख की मांग, मना किया तो शूटर से कराई फायरिंग
बिहार में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी पटना से लेकर जिले-जिलों तक अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब दिनदहाड़े गोलियां चलने लगी हैं। ताजा मामला पटना सिटी का है, जहां मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और एक महिला को गोली मार दी गई। इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था....
बिहार में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी पटना से लेकर जिले-जिलों तक अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब दिनदहाड़े गोलियां चलने लगी हैं। ताजा मामला पटना सिटी का है, जहां मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और एक महिला को गोली मार दी गई। इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आनन-फानन में एनएमसीएच में भर्ती कराया गया
घटना बुधवार दोपहर पटना सिटी के बाइपास थाना क्षेत्र अंतर्गत शिक्षक कॉलोनी की है। बाइक सवार अपराधियों ने नीरज कुमार की पत्नी काजल कुमारी को गोली मार दी । गंभीर रूप से घायल काजल को आनन-फानन में एनएमसीएच में भर्ती कराया गया है।जख्मी काजल कुमारी के पति ने बताया कि उनके घर में हाल ही में बच्चे का जन्म हुआ था। इसकी जानकारी मिलते ही किन्नर घर पर पहुंचे थे। परिवार ने खुशी-खुशी उन्हें 11 हजार रुपये दिए, लेकिन किन्नरों ने एक लाख रुपये की मांग कर दी। जब इतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया गया, तो विवाद शुरू हो गया।
रंजिश में किन्नरों ने शूटरों को बुलवाया
परिजनों का आरोप है कि इसी रंजिश में किन्नरों ने शूटरों को बुलवाया। वहीं घायल महिला काजल ने बताया कि बुधवार को बाइक पर सवार दो युवक घर के पास पहुंचे और फायरिंग कर दी। हमलावरों की मंशा घर की ‘बड़ी दीदी’ पर हमला करने की थी, लेकिन दरवाजे के पास मैं खड़ी थी। गोली बांह में लगी। बता दें कि घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, मामले की जानकारी मिलने के बाद बाइपास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
मामले की छानबीन पुलिस कर रही है
बाइपास थानाध्यक्ष रणजीत कुमार ने बताया कि यह घटना आपसी विवाद से जुड़ी प्रतीत हो रही है। मामले की छानबीन पुलिस कर रही है।बता दें कि राजधानी पटना में इस तरह की घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं रह गया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम लोग गोलियों का शिकार होते रहेंगे और कब अपराध पर लगाम लगेगी?













