ट्रैफिक और प्रदूषण से राहत! पटना में शुरू होगी स्मार्ट Ultra Pods ट्रांसपोर्ट सेवा,मिनटों में पहुंचेंगे दफ्तर

राजधानी पटना में परिवहन व्यवस्था को स्मार्ट और आधुनिक बनाने की दिशा में बिहार सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। सरकारी दफ्तरों के बीच आवाजाही को तेज, आसान और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए जल्द ही ‘अल्ट्रा पॉड्स’ परियोजना शुरू की जाएगी। यह अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली पुराने सचिवालय परिसर और आसपास के प्रमुख प्रशासनिक भवनों.....

ट्रैफिक और प्रदूषण से राहत! पटना में शुरू होगी स्मार्ट Ultra Pods ट्रांसपोर्ट सेवा,मिनटों में पहुंचेंगे दफ्तर

राजधानी पटना में परिवहन व्यवस्था को स्मार्ट और आधुनिक बनाने की दिशा में बिहार सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। सरकारी दफ्तरों के बीच आवाजाही को तेज, आसान और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए जल्द ही ‘अल्ट्रा पॉड्स’ परियोजना शुरू की जाएगी। यह अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली पुराने सचिवालय परिसर और आसपास के प्रमुख प्रशासनिक भवनों को आपस में जोड़ेगी।

एल एंड टी की टीम के बीच अहम बैठक
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और लार्सन एंड टर्बो (एल एंड टी) की टीम के बीच अहम बैठक हुई। बैठक में कंपनी की ओर से परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई और इसके क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।करीब 296 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना के तहत लगभग पांच किलोमीटर लंबे ट्रैक पर अल्ट्रा पॉड्स का संचालन किया जाएगा। प्रस्तावित रूट विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधानसभा होते हुए पुराने सचिवालय तक जाएगा। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना को करीब 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आधुनिक और पूरी तरह स्वचालित परिवहन व्यवस्था
अल्ट्रा पॉड्स दरअसल पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) प्रणाली पर आधारित एक आधुनिक और पूरी तरह स्वचालित परिवहन व्यवस्था है। इसमें छोटे-छोटे पॉड निर्धारित ट्रैक पर चलते हैं और यात्रियों को बिना किसी अनावश्यक रुकावट के सीधे उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं। इस प्रणाली की खास बात यह है कि इसमें चालक की आवश्यकता नहीं होती और पूरी व्यवस्था ऑटोमेटेड तकनीक से संचालित होती है।यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रैक पर कुल 59 पॉड्स चलाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक पॉड में छह लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी और हर सात सेकंड के अंतराल पर अगला पॉड स्टेशन पर उपलब्ध रहेगा। इससे सचिवालय और अन्य प्रशासनिक भवनों के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों का आवागमन तेज और सुगम हो सकेगा।

पहले चरण में कुल नौ स्टेशन बनाए जाएंगे
परियोजना के पहले चरण में कुल नौ स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से दो स्टेशनों के पास पार्किंग की सुविधा भी होगी। इसके अलावा पूरे नेटवर्क की निगरानी और संचालन के लिए एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम और पॉड पार्किंग सुविधा भी विकसित की जाएगी।सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी पॉड्स में कैमरे लगाए जाएंगे और पूरी प्रणाली हाई-टेक ऑटोमेटेड सिस्टम से संचालित होगी। यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल और कार्बन-पॉजिटिव नेटवर्क पर आधारित होगी। खास बात यह है कि ट्रैक निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी
सरकारी वाहनों की आवाजाही कम होने से इस इलाके में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है। खासकर सुबह और शाम के कार्यालय समय में भीड़ को नियंत्रित करने में यह प्रणाली काफी मददगार साबित हो सकती है।यात्रियों के लिए इसका किराया भी बेहद किफायती रखने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। यात्री टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के जरिए आसानी से इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे।