मुंगेर में ‘चालान के नाम पर उगाही’ का आरोप: ड्राइवरों का सड़क जाम, सिस्टम पर उठे सवाल
बिहार में पुलिसिंग और प्रशासनिक सुधारों के दावे भले ही मंचों से गूंजते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों को कटघरे में खड़ा कर देती..
बिहार में पुलिसिंग और प्रशासनिक सुधारों के दावे भले ही मंचों से गूंजते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों को कटघरे में खड़ा कर देती है। ताजा मामला मुंगेर से सामने आया है, जहां परिवहन विभाग पर वसूली के आरोपों को लेकर ड्राइवरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।
अवैध वसूली के खिलाफ सड़क जाम
बता दें कि मुंगेर जिले के तेलिया तालाब के पास उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब वाहन चालकों ने कथित अवैध वसूली के खिलाफ सड़क जाम कर दिया। ड्राइवरों का आरोप है कि परिवहन विभाग के कुछ कर्मी पासिंग और वाहन जांच के नाम पर खुलेआम पैसे वसूल रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि जो चालक रिश्वत देता है, उसका चालान नहीं काटा जाता, जबकि विरोध करने वालों पर नियमों का सख्ती से इस्तेमाल करते हुए बार-बार चालान किया जाता है। कई ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटा गया, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है।उनका कहना है कि यह स्थिति अब ‘जुर्माना व्यवस्था’ से ज्यादा ‘उगाही तंत्र’ बन चुकी है, जहां नियमों से ज्यादा लेन-देन तय करता है कि कौन बचेगा और कौन फंसेगा।
ड्राइवरों को समझा-बुझाकर सड़क जाम हटवाया
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों को समझा-बुझाकर सड़क जाम हटवाया, जिसके बाद यातायात सामान्य हुआ।स्थानीय ड्राइवरों ने आरोप लगाया है कि परिवहन विभाग के कुछ कर्मी और कथित दलाल मिलकर एक संगठित उगाही नेटवर्क चला रहे हैं। उनका दावा है कि बिना पैसे दिए किसी भी वाहन को नहीं छोड़ा जाता और विरोध करने पर चालान के जरिए दबाव बनाया जाता है।
व्यवस्था के भीतर पनप रही गंभीर समस्याओं की ओर इशारा
इस पूरे मामले में अब तक परिवहन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।मुंगेर की सड़कों पर हुआ यह विरोध सिर्फ एक जाम नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर पनप रही गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कानून व्यवस्था है या फिर एक संगठित लूट तंत्र?













