बिहार में खनन विभाग पर निगरानी का शिकंजा, दो इंस्पेक्टरों की अवैध संपत्ति की होगी जांच

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिख रही है। अब खनन विभाग के दो इंस्पेक्टर निगरानी विभाग के रडार पर आ गए हैं। दोनों अधिकारियों की कथित अवैध संपत्ति की जांच की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।दरअसल, इन इंस्पेक्टरों के खिलाफ सेवा काल के दौरान अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत को गंभीरता....

बिहार में खनन विभाग पर निगरानी का शिकंजा, दो इंस्पेक्टरों की अवैध संपत्ति की होगी जांच

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिख रही है। अब खनन विभाग के दो इंस्पेक्टर निगरानी विभाग के रडार पर आ गए हैं। दोनों अधिकारियों की कथित अवैध संपत्ति की जांच की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।दरअसल, इन इंस्पेक्टरों के खिलाफ सेवा काल के दौरान अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निगरानी विभाग ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता से मांगा गया शपथ पत्र और सबूत
निगरानी विभाग की विशेष कार्य पदाधिकारी डेजी ईरानी ने इस मामले में शिकायतकर्ता से औपचारिक शपथ पत्र देने को कहा है।भोजपुर जिला ट्रक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजय यादव को 17 मार्च को लिखे पत्र में निर्देश दिया गया है कि वे अपनी शिकायत के समर्थन में शपथ पत्र और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करें।विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ता को जांच में पूर्ण सहयोग देने की शपथ भी देनी होगी। इसके लिए एक महीने की समय सीमा तय की गई है।

किन अधिकारियों पर है आरोप?
निगरानी विभाग द्वारा जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच की तैयारी की जा रही है, उनमें शामिल हैं -वैशाली में पदस्थापित खनन इंस्पेक्टर चंदन पांडेय और बेगूसराय के खनन इंस्पेक्टर चंदन कुमार। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने अपने सेवा काल के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। सूत्रों के मुताबिक, भोजपुर जिले में पदस्थापन के दौरान इन इंस्पेक्टरों पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में पहले ही विभागीय और निगरानी जांच शुरू हो चुकी है।

 इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध 
जांच के दौरान एक इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। हालांकि, यह भी आरोप सामने आया है कि वर्तमान में वैशाली में पदस्थापित खनन इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता को प्रभावित करने की कोशिश की, ताकि मामला दबाया जा सके।फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और निगरानी विभाग सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। अगर आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना है।