बिहार में अपराधियों पर सख्ती: सम्राट चौधरी का सख्त संदेश,अनंत सिंह का समर्थन

बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की लगातार सख्त कार्रवाई और बढ़ते एनकाउंटर अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है—यह सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। सत्ता औ...

बिहार में अपराधियों पर सख्ती: सम्राट चौधरी का सख्त संदेश,अनंत सिंह का समर्थन

बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की लगातार सख्त कार्रवाई और बढ़ते एनकाउंटर अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है—यह सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं, और सवाल उठ रहा है—क्या यह सख्ती जरूरी है या फिर चयनात्मक कार्रवाई?

अनंत सिंह ने पुलिस कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया

वहीं जदयू विधायक अनंत सिंह ने पुलिस कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि बिहार पुलिस पूरी तरह सही दिशा में काम कर रही है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा “जो अपराध करेगा, वह बचेगा नहीं। महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।जो लोग रात में अपराध करते हैं, उन्हें सुबह उसका अंजाम भुगतना पड़ता है।

कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश 

इधर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया है। हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने डीएम और एसपी को निर्देश दिया—

हत्या या गंभीर अपराध के मामलों में 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी होनी चाहिए।12 से 13 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि अपराधियों में डर का माहौल बने। वहीं गया दौरे के दौरान सीएम सम्राट ने यह भी कहा था कि बिहार में अपराधियों का पिंडदान होगा और कानून का राज हर हाल में कायम रहेगा।

बिहार में आखिर कौन सा मॉडल लागू हो रहा है?

वहीं सरकार के इस सख्त रुख पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने पूछा है,बिहार में आखिर कौन सा मॉडल लागू हो रहा है?विपक्ष का आरोप है कि कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई को जातीय रंग दिया जा रहा है।सुल्तानगंज हत्याकांड के आरोपी रमधनी यादव के एनकाउंटर,गोपालगंज में छोटू यादव पर पुलिस कार्रवाई।इन घटनाओं के बाद सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

विपक्ष इसे चयनात्मक कार्रवाई करार दे रहा है

बता दें कि एक तरफ सरकार इसे अपराध नियंत्रण और सुशासन की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।दूसरी तरफ विपक्ष इसे चयनात्मक कार्रवाई करार दे रहा है।साफ है कि बिहार में अपराध के खिलाफ कार्रवाई अब सिर्फ पुलिसिंग का मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बन चुका है।