वसंत पंचमी 2026: दुर्लभ शुभ योगों में मां सरस्वती की आराधना, शिक्षा और ज्ञान का महापर्व,जानें आज का शुभ मुहूर्त

माघ शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आज वसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया जा रहा है। विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी माना गया है। मंदिरों, शिक्षण संस्थानों और घरों में सरस्वती वंदना की गूंज सुनाई.....

वसंत पंचमी 2026: दुर्लभ शुभ योगों में मां सरस्वती की आराधना, शिक्षा और ज्ञान का महापर्व,जानें आज का शुभ मुहूर्त

माघ शुक्ल पंचमी के पावन अवसर पर आज वसंत पंचमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया जा रहा है। विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी माना गया है। मंदिरों, शिक्षण संस्थानों और घरों में सरस्वती वंदना की गूंज सुनाई दे रही है।

 इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है
आज पूर्वाभाद्र और उत्तरभाद्र नक्षत्र के साथ कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। ज्ञानारंभ, अक्षरारंभ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बसंत ऋतु के स्वागत की झलक हर ओर दिखाई दे रही है। पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर वसंत पंचमी की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

दुर्लभ योगों में सरस्वती पूजा का विशेष फल
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज परिघ योग, शिव योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी-नारायण योग और बुधादित्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। वर्षों बाद बने इस दुर्लभ योग में मां सरस्वती की उपासना करने से विद्या, विवेक, वाणी और स्मरण शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और शिक्षारंभ करने वाले बच्चों के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

मां सरस्वती के स्वरूप का आध्यात्मिक संदेश
मां सरस्वती का श्वेत वस्त्र पवित्रता, शांति और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। उनका वाहन हंस विवेक का प्रतीक है, जो सत्य और असत्य में अंतर करना सिखाता है। मां के हाथों में विराजमान वीणा यह संदेश देती है कि नाद, मंत्र, भजन और स्वाध्याय के माध्यम से आत्मिक आनंद और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति संभव है, जिससे साधक सांसारिक मोह से ऊपर उठ सकता है।

पीले वस्त्रों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता का कारक है। मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी माघ शुक्ल पंचमी को पीतांबर धारण कर मां सरस्वती की पूजा की थी। वहीं ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त का दर्जा प्राप्त है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया वाहन खरीदना, संपत्ति से जुड़े कार्य या किसी भी नए कार्य की शुरुआत बिना किसी विशेष मुहूर्त देखे की जा सकती है।

आज के शुभ मुहूर्त
आज पंचमी तिथि देर रात 12:22 बजे तक रहेगी।
प्रातः 06:38 से 10:40 बजे तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त 11:40 से 12:23 बजे तक रहेगा।
वृष लग्न में दोपहर 12:28 से 02:25 बजे तक पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ मूर्ति विसर्जन
सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। पटना नगर निगम की ओर से विभिन्न अंचलों में कुल सात कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं, जिनमें ही मूर्ति और पूजन सामग्री के विसर्जन के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।बांकीपुर, पाटलिपुत्र, अजीमाबाद और पटना सिटी अंचल में बनाए गए इन आर्टिफिशियल तालाबों पर बैरिकेडिंग, लाइटिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नगर निगम की टीमें पंडालों की निगरानी करेंगी और स्वच्छता मानकों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा