बिहार में ट्रांसपोर्टेशन में ऐतिहासिक बदलाव, माल ढुलाई होगी 50% तक सस्ती,गंगा बनेगी बिहार की नई व्यापारिक राह
बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। नीतीश कुमार सरकार एक ऐसी ट्रांसपोर्ट क्रांति की नींव रखने जा रही है, जिससे राज्य में माल ढुलाई की लागत 50 प्रतिशत तक घट सकती है। यह बदलाव सड़क या रेल से नहीं, बल्कि गंगा और अन्य जलमार्गों के जरिए आएगा। सरकार राज्य में Inland Waterways को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है, जिसे औद्योगिक विकास.....
बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। नीतीश कुमार सरकार एक ऐसी ट्रांसपोर्ट क्रांति की नींव रखने जा रही है, जिससे राज्य में माल ढुलाई की लागत 50 प्रतिशत तक घट सकती है। यह बदलाव सड़क या रेल से नहीं, बल्कि गंगा और अन्य जलमार्गों के जरिए आएगा। सरकार राज्य में Inland Waterways को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है, जिसे औद्योगिक विकास का गेमचेंजर माना जा रहा है।
आधी लागत, चार गुना ज्यादा माल
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई सड़क परिवहन की तुलना में कहीं ज्यादा सस्ती और प्रभावी है। जहां सड़क मार्ग से प्रति टन प्रति किलोमीटर खर्च 2.50 से 4 रुपये आता है, वहीं जलमार्ग से यही खर्च सिर्फ 1 से 1.50 रुपये रहता है।इसका सीधा मतलब है कि 100 टन सामान को 500 किलोमीटर दूर भेजने पर पानी के रास्ते केवल 50 से 75 हजार रुपये खर्च होंगे, जबकि सड़क मार्ग से यही लागत 1.25 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यही नहीं, एक बार में सड़क परिवहन की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा भारी कार्गो भेजा जा सकता है।
किसानों और कारोबारियों को सीधा फायदा
सरकार की योजना के तहत रेत, सब्जियां, फल और भारी उद्योगों से जुड़ा कच्चा माल जलमार्ग के जरिए भेजना प्राथमिकता में होगा। इससे न सिर्फ किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि व्यापारियों को टोल टैक्स और ईंधन पर होने वाला भारी खर्च भी बचेगा।राज्य में मौजूद 21 सामुदायिक जेटियों के आसपास हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे, ताकि किसान सीधे उपभोक्ताओं तक ताजा फल-सब्जियां पहुंचा सकें। इसके अलावा 17 नई जेटियों के निर्माण की योजना भी तैयार की गई है।
पटना-भागलपुर से इंटरनेशनल बाजार तक
फिलहाल बिहार में दो Ro-Pax (रो-पैक्स) जहाज संचालित हो रहे हैं—एक पटना में और दूसरा भागलपुर में। आने वाले समय में बिहार से पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक माल पहुंचाने के लिए एक डेडिकेटेड रोडमैप तैयार किया जा रहा है।इसके तहत राज्य में नए अंतरराज्यीय कार्गो टर्मिनल भी विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में केंद्र सरकार से बिहार को लगभग एक दर्जन कार्गो जहाज मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सब्सिडी नियमों में बदलाव की मांग
राज्य सरकार जलवाहक योजना के तहत केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी को और आसान बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) पर सब्सिडी के लिए न्यूनतम दूरी को 300 किलोमीटर से घटाकर 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव भेजा गया है।अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो बक्सर, कालुघाट, पटना-हाजीपुर, मोकामा, भागलपुर और साहिबगंज जैसे शहरों के बीच जल परिवहन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय अनुभव की अनदेखी पड़ी भारी तो?
गंगा नदी के जानकार और स्थानीय गोताखोर राजेंद्र साहनी ने इस योजना को लेकर अहम चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जल परिवहन शुरू करने से पहले स्थानीय अनुभव का पूरा इस्तेमाल जरूरी है।उन्होंने सुझाव दिया कि कम से कम 50 अनुभवी मछुआरों को तैनात किया जाना चाहिए, जो नदी की गहराई, बहाव और मौसमी बदलावों को अच्छी तरह समझते हों। उनका मानना है कि बिना स्थानीय मार्गदर्शन के फरक्का से बिहार की ओर जहाज चलाने पर उनके फंसने का खतरा बना रह सकता है।
निवेश के लिए बिहार बनेगा नया हब?
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि माल ढुलाई की लागत में भारी कमी बिहार को निवेश के लिहाज से कहीं अधिक आकर्षक बनाएगी। इससे न सिर्फ उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।जनवरी के अंत में इस योजना को लेकर केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन व जलमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच एक अहम बैठक प्रस्तावित है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो गंगा सचमुच बिहार के विकास की नई धारा बन सकती है।













