अब पटना में गलत पार्किंग पर नहीं चलेगी चालाकी, कैमरा देखेगा और सीधे मोबाइल पर पहुंचेगा ई-चालान
पटना की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ना भारी पड़ने वाला है। नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करते ही न पुलिस रोकेगी, न बहस की गुंजाइश होगी। हाई-टेक कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पहचानेंगे और कुछ ही पलों में ई-चालान सीधे आपके मोबाइल फोन पर भेज दिया जाएगा।राजधानी में बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने तकनीक के सहारे.....
पटना की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ना भारी पड़ने वाला है। नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करते ही न पुलिस रोकेगी, न बहस की गुंजाइश होगी। हाई-टेक कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पहचानेंगे और कुछ ही पलों में ई-चालान सीधे आपके मोबाइल फोन पर भेज दिया जाएगा।राजधानी में बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने तकनीक के सहारे सख्ती शुरू कर दी है, और इसके नतीजे अब जमीन पर दिखने लगे हैं।
डेढ़ महीने में 4800 से ज्यादा मामले
पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के आंकड़ों के मुताबिक 1 दिसंबर से 22 जनवरी के बीच नो-पार्किंग में वाहन खड़ा करने के 4806 मामले सामने आए। इनमें से 2371 वाहनों की पहचान कर ई-चालान जारी किया गया। दिसंबर में 2669 वाहन नो-पार्किंग में पाए गए, जिनमें 793 पर चालान कटा। जनवरी में 2137 मामले सामने आए और 1578 वाहनों पर कार्रवाई हुई। आंकड़े साफ बताते हैं कि जैसे-जैसे निगरानी बढ़ी है, नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा और कसता जा रहा है।
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में 24 घंटे नजर
जाम और अव्यवस्था से जूझने वाले इलाकों में अब रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की जा रही है।इन प्रमुख सड़कों और क्षेत्रों में चौबीसों घंटे कैमरे सक्रिय हैं—नेहरू पथ, बोरिंग रोड, कंकड़बाग, राजाबाजार, फ्रेजर रोड, एग्जीबिशन रोड, पटना जंक्शन क्षेत्र और गांधी मैदान।इन कैमरों का मकसद सिर्फ चालान काटना नहीं, बल्कि अवैध पार्किंग पर रोक लगाकर ट्रैफिक जाम कम करना और यातायात को सुचारु बनाना है।
28 नवंबर से लागू है ई-चालान की कार्रवाई
पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के एमडी यशपाल मीणा के निर्देश पर 28 नवंबर 2025 से निगरानी कैमरों के जरिए ई-चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की गई।पटना सिटी कमिश्नर ने भी साफ कहा है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तकनीक के जरिए तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
डंडा नहीं, जिम्मेदारी का संदेश
यह व्यवस्था सिर्फ सजा देने के लिए नहीं है, बल्कि पटना में ट्रैफिक कल्चर बदलने की एक ठोस कोशिश है। अब ड्राइवर यह सोचकर लापरवाही नहीं कर सकते कि “थोड़ी देर के लिए गाड़ी खड़ी कर देते हैं।”नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ियां ही अक्सर जाम की सबसे बड़ी वजह बनती हैं। जब सड़क का हिस्सा पार्किंग बन जाता है, तो पूरा ट्रैफिक सिस्टम चरमरा जाता है।अगर यह अभियान इसी सख्ती के साथ जारी रहा, तो आने वाले दिनों में पटना की सड़कों पर जाम कम होगा, यातायात ज्यादा व्यवस्थित होगा और राजधानी एक स्मार्ट, अनुशासित और आधुनिक शहर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।













