नामांकन वापसी के 'ड्रामे' के बाद एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पर विवाद; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लिया आशीर्वाद

भाजपा का अभेद्य किला मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब शह-मात के खेल में तब्दील हो चुका है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस पारिवारिक सीट को बचाने उतरी भाजपा अपने ही फैसलों और नए उम्मीदवार के बायोडाटा को लेकर चौतरफा विवादों से घिर गई है। 

नामांकन वापसी के 'ड्रामे' के बाद एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पर विवाद; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लिया आशीर्वाद

DESWA DESK : भाजपा का अभेद्य किला मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब शह-मात के खेल में तब्दील हो चुका है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस पारिवारिक सीट को बचाने उतरी भाजपा अपने ही फैसलों और नए उम्मीदवार के बायोडाटा को लेकर चौतरफा विवादों से घिर गई है। 

पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक बंटी द्वारा नामांकन के महज 24 घंटे के भीतर अचानक पर्चा वापस लेने और फिर आनन-फानन में जमीनी कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा की एंट्री ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। अब नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के दावों पर ही विपक्षी दलों ने तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा घोषित नए प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के राजनीतिक सफरनामे पर विपक्ष ने उंगली उठाई है। नीरज के प्रोफाइल के मुताबिक, 1 जुलाई 1994 को जन्मे नीरज ने साल 2006 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली थी। विपक्ष इसी पॉइंट को लेकर हमलावर है कि महज 12 साल की नाबालिग उम्र में कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का प्राथमिक सदस्य कैसे बन सकता है? इस तकनीकी और नैतिक पहलू को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक भाजपा को घेरा जा रहा है।

पार्टी के भीतर और बाहर इस बात को लेकर गंभीर चर्चा है कि बांकीपुर जैसी सुरक्षित सीट पर भाजपा इस बार इतनी हड़बड़ी और असमंजस में क्यों दिख रही है?  बड़े तामझाम के साथ बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में जनसभा करने के बाद अभिषेक बंटी का अचानक पारिवारिक कारणों का हवाला देकर नाम वापस लेना, लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

 वहीं, 24 घंटे के भीतर बिना किसी पूर्व संकेत के एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को सीधे चुनावी अखाड़े में उतार दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद की मजबूत घेराबंदी के बीच भाजपा अपने इस सबसे मजबूत गढ़ में किसी आंतरिक असंतोष या रणनीतिक चूक से घबरा गई है, जिसके चलते यह अप्रत्याशित फेरबदल करना पड़ा है।

उधर, इन तमाम विवादों और सियासी बयानबाजी के बीच भाजपा के नए उम्मीदवार नीरज कुमार  सिन्हा ने शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लोकसेवक स्थित सरकारी आवास पर जाकर शिष्टाचार मुलाकात की। नीरज ने मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें पूरी ताकत से चुनावी मैदान में डटने और बांकीपुर की जनता के बीच एनडीए सरकार के विकास कार्यों को ले जाने की नसीहत दी। नीरज के साथ इस दौरान पटना के स्थानीय भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए विपक्षी महागठबंधन और कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने कहा है कि भाजपा को बांकीपुर में अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। पहले उम्मीदवार को डराकर बैठाया गया और अब जिस नए चेहरे को लाया गया है, उनका बायोडाटा ही फर्जी दावों की गवाही दे रहा है। 12 साल के बच्चे को सदस्य बनाने वाली पार्टी से देश के नियमों के पालन की क्या उम्मीद की जाए? 

दूसरी ओर, भाजपा खेमे का कहना है कि नीरज कुमार के दादा और चाचा (नरेंद्र भारती) जनसंघ के जमाने के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए बचपन से ही उनका झुकाव पार्टी की तरफ था। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे इस तरह की बचकानी बातें कर रहे हैं। बहरहाल, बांकीपुर की यह जंग अब बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।