टीएमसी के 20 सांसदों की बगावत के बीच शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा एलान- संकट में दीदी का साथ नहीं छोड़ूंगा

बागी गुट में अपना नाम उछाले जाने पर आसनसोल से लोकसभा सांसद और बॉलीवुड के 'शॉटगन' शत्रुघ्न सिन्हा ने चुप्पी तोड़ी है। सिन्हा ने साफ कर दिया है कि वह ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहेंगे और इस मुश्किल घड़ी में उनका साथ बिल्कुल नहीं छोड़ेंगे।

टीएमसी के 20 सांसदों की बगावत के बीच शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा एलान- संकट में दीदी का साथ नहीं छोड़ूंगा

DESWA DESK : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से घिर गई है। विधानसभा में 58 विधायकों के बागी रुख के बाद अब संसद में भी पार्टी टूट गई है। लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से करीब 20 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।

इस राजनीतिक महाभूकंप के बीच, बागी गुट में अपना नाम उछाले जाने पर आसनसोल से लोकसभा सांसद और बॉलीवुड के 'शॉटगन' शत्रुघ्न सिन्हा ने चुप्पी तोड़ी है। सिन्हा ने साफ कर दिया है कि वह ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहेंगे और इस मुश्किल घड़ी में उनका साथ बिल्कुल नहीं छोड़ेंगे।

अपना नाम बागियों की सूची में आने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अफवाहों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि साल 2019 में जब मैं पटना साहिब से चुनाव हार गया था और अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था, तब बहुत कम लोग मेरे साथ खड़े थे। उस संकट के समय ममता बनर्जी ने मुझ पर भरोसा जताया, मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया और उन्हीं के निर्देश पर मैं आसनसोल से चुनाव जीतकर संसद पहुंचा।

सिन्हा ने दो टूक शब्दों में अपनी राजनीतिक शुचिता की बात करते हुए कहा कि मेरा सिद्धांत बिल्कुल साफ है, जब ममता दी मेरी मुसीबत में मेरे साथ खड़ी थीं, तो आज उनके इस कठिन दौर में उनके साथ मजबूती से खड़े रहना मेरा फर्ज और जिम्मेदारी है। मैं 'जोड़ा फूल' (टीएमसी का प्रतीक) के सिंबल पर जीतकर आया हूं, मैं ममता दीदी के साथ ही रहूंगा।

बागी हुए 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के दफ्तर को पत्र लिखकर संसद में अलग ब्लॉक के रूप में बैठने की अनुमति मांगी है। बागियों का दावा है कि वे बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बाहर से समर्थन देंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सांसदों और विधायकों की इस बगावत की मुख्य वजह चुनाव में हार और संगठन के भीतर ममता बनर्जी के भतीजे व महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर पनपा असंतोष है। दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी और संसद में बागी गुट, दोनों ही अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को खारिज कर रहे हैं, लेकिन ममता बनर्जी को अब भी अपनी 'दीदी' और सलाहकार मान रहे हैं। फिलहाल, इस टूट ने न सिर्फ बंगाल बल्कि दिल्ली की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है।