भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल को जान से मारने की धमकी, गांधी मैदान थाने में दर्ज कराई एफआईआर

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और मधुबनी के बिस्फी से पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। बेखौफ अज्ञात कॉलर ने फोन पर न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उन्हें गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी। इस संबंध में पूर्व विधायक ने पटना के गांधी मैदान थाने में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल को जान से मारने की धमकी, गांधी मैदान थाने में दर्ज कराई एफआईआर

DESWA DESK : भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और मधुबनी के बिस्फी से पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल को मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। बेखौफ अज्ञात कॉलर ने फोन पर न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उन्हें गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी। इस संबंध में पूर्व विधायक ने पटना के गांधी मैदान थाने में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दिए आवेदन में हरिभूषण ठाकुर बचौल ने बताया कि 25 जुलाई की शाम करीब पौने नौ बजे उनके मोबाइल नंबर (9771629033 और 9431086734) पर मोबाइल नंबर 9631486536 से कॉल आया। कॉल रिसीव करते ही दूसरी तरफ से उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी दी गई। बचौल के अनुसार, कॉल करने वाला लगातार आपत्तिजनक और हिंसक बातें करता रहा। घटना के तुरंत बाद जब उन्होंने उस नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो कॉल रिसीव नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा दी गई धमकी के बाद मुझे अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता हुई है। प्रशासन से आग्रह है कि आरोपी को जल्द से जल्द चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

गांधी मैदान थाने में सौंपी गई लिखित शिकायत में भाजपा नेता ने मांग की है कि धमकी देने वाले अज्ञात आरोपी की तत्काल पहचान की जाए। साथ ही,  मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर सख्त कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मामला हाई-प्रोफाइल नेता से जुड़ा होने के कारण गांधी मैदान थाना पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस धमकी देने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर की सीडीआर और सर्विलांस रिपोर्ट निकाल रही है। इसके साथ ह ही, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और टावर लोकेशन की मदद से कॉलर के ठिकाने का पता लगाया जा रहा है।