मुजफ्फरपुर में लीची किसानों पर 'स्टिंक बग' का कहर: 70 फीसदी फसल बर्बाद, कर्ज के जाल में फंसे बागबान

शाही लीची की मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर मुजफ्फरपुर के किसानों के लिए इस बार का सीजन किसी भयावह त्रासदी में बदल गया है। पहले मौसम की बेरुखी और फिर 'स्टिंक बग' के भीषण हमले ने जिले की करीब 70 फीसदी लीची की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बागों में पेड़ों पर लदी लीची देखते ही देखते काली पड़कर बर्बाद हो गई, जिससे किसानों और व्यापारियों के सुनहरे सपनों पर पानी फिर गया है। इस अप्रत्याशित नुकसान ने लीची उत्पादकों की कमर तोड़ दी है और वे लाखों के कर्जदार हो गए हैं।

 मुजफ्फरपुर में लीची किसानों पर 'स्टिंक बग' का कहर: 70 फीसदी फसल बर्बाद, कर्ज के जाल में फंसे बागबान

DESWA DESK : शाही लीची की मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर मुजफ्फरपुर के किसानों के लिए इस बार का सीजन किसी भयावह त्रासदी में बदल गया है। पहले मौसम की बेरुखी और फिर 'स्टिंक बग' के भीषण हमले ने जिले की करीब 70 फीसदी लीची की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। बागों में पेड़ों पर लदी लीची देखते ही देखते काली पड़कर बर्बाद हो गई, जिससे किसानों और व्यापारियों के सुनहरे सपनों पर पानी फिर गया है। इस अप्रत्याशित नुकसान ने लीची उत्पादकों की कमर तोड़ दी है और वे लाखों के कर्जदार हो गए हैं।

किसी ने शादी की पूंजी लगाई, कोई 30 लाख का कर्जदार हुआ
इस बार लीची की अच्छी बंपर पैदावार की उम्मीद में किसानों और स्थानीय व्यापारियों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी और भारी-भरकम कर्ज लेकर बाग खरीदे थे। पीड़ित किसानों की दास्तान रूह कंपाने वाली है। मीनापुर और मुशहरी ब्लॉक के कई किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए रखी रकम को इस उम्मीद में लीची के कारोबार में लगा दिया था कि मुनाफे से धूमधाम से शादी करेंगे, लेकिन अब पूंजी भी डूब गई। वहीं, कई बड़े व्यापारियों ने बैंक और महाजनों से 25 से 30 लाख रुपये तक का कर्ज लेकर बाग लीज पर लिए थे, जो अब पूरी तरह कर्ज के दलदल में धंस चुके हैं।

'स्टिंक बग' ने ऐसे ढाया सितम
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल मार्च और अप्रैल के महीने में मौसम के मिजाज में तेजी से उतार-चढ़ाव आया। इसके बाद 'स्टिंक बग' नामक कीट ने लीची के बागों पर धावा बोल दिया। यह कीड़ा लीची के फलों का रस चूस लेता है, जिससे फल अंदर से सड़ जाते हैं और उनका रंग काला पड़ जाता है। किसानों ने कीट से बचाव के लिए महंगी कीटनाशकों का छिड़काव भी किया, लेकिन इस बार कोई भी दवा काम नहीं आई और देखते ही देखते लहलहाते बाग उजाड़ हो गए।

मंडियां सूनीं, व्यापारी और मजदूर भी बेहाल
फसल की इस भारी तबाही का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर पड़ा है। मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लीची मंडियों में इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है। देश के दूसरे राज्यों से आने वाले बड़े व्यापारी खाली हाथ लौट रहे हैं। इसके साथ ही, लीची की तुड़ाई, पैकिंग और ढुलाई के काम से जुड़े हजारों दैनिक मजदूरों के सामने भी इस सीजन में रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

सरकार से लगाई मुआवजे की गुहार
मुजफ्फरपुर के लीची उत्पादक संघ और पीड़ित किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से इस त्रासदी को विशेष आपदा घोषित करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने उन्हें बैंक लोन में राहत और उचित मुआवजा नहीं दिया, तो लीची की खेती से जुड़े सैकड़ों परिवार पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे और उनके सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 'स्टिंक बग' का प्रकोप इस साल अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। तापमान में अचानक वृद्धि के कारण इस कीट की आबादी तेजी से फैली, जिसने दवाओं के बेअसर होने पर फसल को चंद दिनों में तबाह कर दिया।