पैदल, साइकिल और ई-रिक्शा के सहारे चला बिहार, नो व्हीकल डे पर दिखी नई पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बिहार में शुक्रवार को “नो व्हीकल डे” की शुरुआत देखने को मिली। सरकार के मंत्री, अधिकारी और सुरक्षाकर्मी अलग-अलग तरीकों से बिना निजी वाहन के अपने दफ्तर..

पैदल, साइकिल और ई-रिक्शा के सहारे चला बिहार, नो व्हीकल डे पर दिखी नई पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बिहार में शुक्रवार को “नो व्हीकल डे” की शुरुआत देखने को मिली। सरकार के मंत्री, अधिकारी और सुरक्षाकर्मी अलग-अलग तरीकों से बिना निजी वाहन के अपने दफ्तर पहुंचे। हालांकि, इस पहल के बीच सचिवालय परिसर में बड़ी संख्या में गाड़ियों की मौजूदगी ने कई सवाल भी खड़े कर दिए।

बिहार में दिखा ‘नो व्हीकल डे’ का असर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को CM हाउस से सचिवालय तक करीब 50 मीटर पैदल चलते हुए पहुंचे। वहीं RLM सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश अपने सरकारी आवास से करीब 1 किलोमीटर पैदल चलकर सचिवालय पहुंचे।शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ई-रिक्शा से सचिवालय पहुंचे। इस दौरान उनके समर्थकों ने “भारत माता की जय” के नारे भी लगाए।

अधिकारियों ने भी दिया संदेश

खगड़िया में DM-SP समेत कई अधिकारी साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। खास बात यह रही कि उनके सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर नजर आए।वहीं गयाजी रेलवे स्टेशन के बाहर RPF जवान भी साइकिल से गश्त करते दिखाई दिए। प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों की इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत से जोड़कर देखा जा रहा है।

सचिवालय में फिर भी दिखीं हजारों गाड़ियां

सरकार की अपील के बावजूद सचिवालय परिसर में करीब 1700 बाइक और 250 कारें पार्क मिलीं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या “नो व्हीकल डे” सिर्फ प्रतीकात्मक बनकर रह जाएगा या इसे आम लोगों और सरकारी कर्मचारियों के बीच व्यापक समर्थन मिलेगा।

CM ने की थी बड़ी अपील

गुरुवार को पटना से दरभंगा जाने के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तीन गाड़ियों के काफिले के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे। इससे पहले उनके काफिले में 19 गाड़ियां शामिल रहती थीं।दरभंगा में आयोजित कार्यक्रम में CM ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन अपनाने, निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” मनाने की अपील की थी। उन्होंने सरकारी और निजी कार्यालयों में जरूरत पड़ने पर “वर्क फ्रॉम होम” लागू करने की भी बात कही थी।

पर्यावरण और ट्रैफिक दोनों पर फोकस

सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य प्रदूषण कम करना, ईंधन की बचत करना और शहरों में ट्रैफिक दबाव घटाना है। अब देखना होगा कि बिहार में “नो व्हीकल डे” एक दिन की मुहिम बनकर रह जाता है या यह लोगों की आदतों में स्थायी बदलाव ला पाता है।