लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को झटका, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की याचिकाएं
लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की विशेष अदालत ने दोनों की ओर से दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कथित “अनरिलायड” दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आरोपियों की यह मांग न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और ट्रायल को लं...
लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की विशेष अदालत ने दोनों की ओर से दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कथित “अनरिलायड” दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आरोपियों की यह मांग न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने और ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिश है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अनुरोध मुकदमे को अनावश्यक रूप से उलझाने के समान हैं।
क्या है पूरा मामला?
अदालत ने यह भी माना कि इन दस्तावेजों को एक साथ उपलब्ध कराना पूरी न्यायिक प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर सकता है। इसी के साथ लालू यादव के निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं।सीबीआई के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे की चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन के प्लॉट लिए गए, जिन्हें कथित तौर पर लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम कराया गया।इस मामले में 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें राबड़ी देवी, उनकी बेटियों समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
जज विशाल गोगने ने कहा कि मुकदमे पर अदालत का नियंत्रण आरोपियों की जिरह के बहाने छीना नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष पहले ही उपलब्ध दस्तावेजों का निरीक्षण कर चुका है, इसलिए नए दस्तावेज देने की मांग उचित नहीं है।अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुसार साक्ष्य दर्ज करना आवश्यक है. आरोपियों को अब न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं है। इस फैसले के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।













