बिहार में जाति सर्वे के आंकड़ों पर छपेगी किताब, हर जाति की कमाई और जमीन का मिलेगा पूरा ब्यौरा

बिहार में हुए जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वे के आंकड़ों को अब राज्य सरकार एक विस्तृत किताब की शक्ल देने जा रही है। नीतीश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस किताब में सूबे की हर एक जाति की आर्थिक स्थिति, उनकी औसत कमाई और उनके पास मौजूद जमीन-जायदाद (संपत्ति) का सिलसिलेवार और प्रामाणिक लेखा-जोखा दर्ज होगा।

बिहार में जाति सर्वे के आंकड़ों पर छपेगी किताब, हर जाति की कमाई और जमीन का मिलेगा पूरा ब्यौरा

DESWA DESK : बिहार में हुए जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वे के आंकड़ों को अब राज्य सरकार एक विस्तृत किताब की शक्ल देने जा रही है। नीतीश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस किताब में सूबे की हर एक जाति की आर्थिक स्थिति, उनकी औसत कमाई और उनके पास मौजूद जमीन-जायदाद (संपत्ति) का सिलसिलेवार और प्रामाणिक लेखा-जोखा दर्ज होगा।

समाज का 'आर्थिक एक्स-रे' बनेगी यह किताब
सरकार का मानना है कि इस किताब के प्रकाशन के बाद समाज की हर जाति की असली सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सच पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आ सकेगा। इसे एक तरह से बिहार के समाज का 'आर्थिक एक्स-रे' माना जा रहा है, जिससे यह साफ हो जाएगा कि विकास की दौड़ में कौन सी जातियां आगे रहीं और कौन सी पायदान पर सबसे पीछे छूट गईं।

इस किताब के मुख्य आकर्षण और बिंदु 
कमाई का सिलसिलेवार ब्यौरा : हर जाति के परिवारों की मासिक और सालाना आय का पूरा डेटा ग्राफ और तालिकाओं के साथ पेश किया जाएगा। किस जाति के पास कितनी कृषि योग्य भूमि है और कितने लोग भूमिहीन हैं, इसका सटीक विवरण होगा। नौकरियों में विभिन्न जातियों की भागीदारी का पूरा खाका इसमें खींचा जाएगा।

जल्द प्रकाशन के लिए प्रकाशकों से मिलाया हाथ
इस बड़े पैमाने के काम को बिना किसी देरी के और बेहद पेशेवर तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने नामी प्रकाशकों (Publishers) से हाथ मिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, किताब की छपाई और वितरण की रूपरेखा तय की जा रही है ताकि यह जल्द से जल्द आम जनता, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए उपलब्ध हो सके।

भविष्य की योजनाओं का आधार बनेगी किताब
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह किताब सिर्फ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं होगी, बल्कि आने वाले समय में बिहार की कल्याणकारी योजनाओं और बजट के आवंटन का मुख्य आधार बनेगी। इस डेटा की मदद से सरकार उन जातियों के लिए विशेष योजनाएं तैयार कर सकेगी जिन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए तुरंत मदद की जरूरत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस किताब के बाजार में आने के बाद राज्य की सियासत और नीति-निर्माण में क्या नए मोड़ आते हैं।

2 अक्टूबर 2023 को जारी हुए थे आंकड़े 
बताते चलें कि राज्य सरकार ने 2 अक्टूबर 2023 को जातीय गणना के मुख्य आंकड़े जारी किए थे। आंकड़े के अनुसार बिहार की कुल आबादी 13.07 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें 12.53 करोड़ से ज्यादा लोग बिहार में रहते हैं और करीब 53.72 लाख लोग राज्य से बाहर रहते हैं।