हिंदी प्रदेश में हिंदी में ही फेल ! बिहार पुलिस के दौ सौ से अधिक सिपाही मातृभाषा में चूके, रुका प्रमोशन

जिस राज्य की रग-रग में हिंदी बसती है, जहां दशकों से शिक्षा और शासन में राजभाषा को प्राथमिकता दी जाती रही है, उसी बिहार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कानून-व्यवस्था और अपराधियों की कुंडली खंगालने वाली बिहार पुलिस के कई जवान हिंदी की बुनियादी परीक्षा की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। विभागीय प्रमोशन परीक्षा में राजभाषा की समझ कमजोर होने की वजह से बड़ी संख्या में सिपाहियों का एएसआई बनने का सपना फिलहाल टूट गया है।

हिंदी प्रदेश में हिंदी में ही फेल ! बिहार पुलिस के दौ सौ से अधिक सिपाही मातृभाषा में चूके, रुका प्रमोशन

DESWA DESK : जिस राज्य की रग-रग में हिंदी बसती है, जहां दशकों से शिक्षा और शासन में राजभाषा को प्राथमिकता दी जाती रही है, उसी बिहार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कानून-व्यवस्था और अपराधियों की कुंडली खंगालने वाली बिहार पुलिस के कई जवान हिंदी की बुनियादी परीक्षा की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। विभागीय प्रमोशन परीक्षा में राजभाषा की समझ कमजोर होने की वजह से बड़ी संख्या में सिपाहियों का एएसआई बनने का सपना फिलहाल टूट गया है।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिपाही से जमादार पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा में कुल 391 सिपाहियों को अयोग्य घोषित किया गया है। बेहद हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से दो सौ से अधिक सिपाही केवल हिंदी विषय में फेल हुए हैं। इसके अलावा, करीब सौ से अधिक ऐसे सिपाही भी हैं, जिनके खिलाफ पहले से ही कोई विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने के कारण उन्हें अयोग्य माना गया है।

परीक्षा मूल्यांकन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, लिखित परीक्षा में कई अभ्यर्थी हिंदी व्याकरण की बेहद सामान्य गलतियां कर बैठे। वे रोजमर्रा के शब्दों का सही प्रयोग भी नहीं कर सके। व्याकरण की इन बुनियादी चूकों का सीधा असर उनके परिणाम पर पड़ा और वे प्रमोशन की रेस से बाहर हो गए। बिहार पुलिस विभाग ने साफ कर दिया है कि एएसआई बनने के लिए हिंदी की परीक्षा पास करना अनिवार्य है।

 हिंदी में फेल होने का खामियाजा सिपाहियों को सिर्फ पदोन्नति गंवाकर ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी भुगतना होगा। नियमानुसार ऐसे सिपाहियों को एसीपी और एमएसीपी जैसी सेवा संबंधी वित्तीय और पदोन्नति योजनाओं का लाभ भी तब तक नहीं मिल सकेगा, जब तक वे यह परीक्षा पास नहीं कर लेते।

इस परीक्षा में कुल 1545 सिपाही सफल रहे हैं, जिन्हें एएसआई के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। ये नए अधिकारी अब थानों और विभिन्न विंगों में आपराधिक मामलों की तफ्तीश, डायरी लेखन और अन्य महत्वपूर्ण पुलिसिया जिम्मेदारियों को संभालेंगे। हालांकि, पुलिस मुख्यालय ने अनुत्तीर्ण रहे सिपाहियों को पूरी तरह निराश नहीं किया है। विभाग ने उन्हें एक और अवसर देते हुए कहा है कि वे अगली विभागीय परीक्षा में दोबारा शामिल हो सकते हैं।