मंत्री पद पर संकट: क्या जाएगी उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी? रालोमो में नए चेहरों पर मंथन शुरू

दीपक प्रकाश को मंत्री पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। इस कानूनी पेंच के बाद अब कयासों का बाजार गर्म है कि यदि दीपक प्रकाश को इस्तीफा देना पड़ा, तो राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) से उनकी जगह कौन लेगा? राजनीतिक गलियारों में उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता, दीपक प्रकाश की पत्नी साक्षी, माधव आनंद और आलोक सिंह के नामों की चर्चा तेज हो गई है कि इनमें से किसे मंत्री पद की नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

मंत्री पद पर संकट: क्या जाएगी उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी? रालोमो में नए चेहरों पर मंथन शुरू

DESWA DESK : बिहार की सियासत से इस वक्त की चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सम्राट सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी पर कानूनी संकट के बादल गहरा गए हैं, जिससे उनका मंत्री बने रहना अब बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। दीपक प्रकाश को मंत्री पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। इस कानूनी पेंच के बाद अब कयासों का बाजार गर्म है कि यदि दीपक प्रकाश को इस्तीफा देना पड़ा, तो राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) से उनकी जगह कौन लेगा? राजनीतिक गलियारों में उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता, दीपक प्रकाश की पत्नी साक्षी, माधव आनंद और आलोक सिंह के नामों की चर्चा तेज हो गई है कि इनमें से किसे मंत्री पद की नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला बना दीपक के लिए 'फांस'
दीपक प्रकाश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर हुई है, उसका आधार बेहद मजबूत और सीधा नजर आ रहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में 1995 और 1996 में कांग्रेस की सरकार के दौरान मंत्री बने तेज प्रकाश सिंह के ऐतिहासिक मामले में एक स्पष्ट नजीर पेश की थी। शीर्ष कोर्ट ने साफ किया था कि यदि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो वह संविधान के तहत केवल 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इस प्रावधान का लाभ उठाकर इस्तीफा देने के कुछ अंतराल बाद या सरकार पुनर्गठन (कैबिनेट रीशफल) के रास्ते बिना सदस्य बने दोबारा मंत्री बनना पूरी तरह अवैध और संविधान की भावना के खिलाफ है। दीपक प्रकाश का मामला हूबहू इसी कानूनी दायरे में फंसता दिख रहा है।

नीतीश कैबिनेट के इस्तीफे और 6 महीने का पूरा गणित
दीपक प्रकाश पहली बार नवंबर में नीतीश कैबिनेट में मंत्री बने थे। बिना सदस्य रहे उनके मंत्री पद का 6 महीने का कार्यकाल 20 मई को पूरा होने वाला था। लेकिन उससे ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट भंग करते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जब सम्राट सरकार का गठन हुआ, तो 7 मई को दीपक ने दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने से पहले, सोमवार को पटना एयरपोर्ट पर रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश का बचाव करते हुए कहा था कि उन्हें दोबारा मंत्री बने अभी एक ही महीना हुआ है, इसलिए इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। कुशवाहा इस समय सीमा को 7 मई से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला इस तर्क को खारिज करता नजर आ रहा है।

रालोमो में नए चेहरे की तलाश: रेस में कई नाम
इस कानूनी उठापटक के बीच अब गठबंधन के भीतर नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि अगर कोर्ट के दबाव में दीपक प्रकाश को हटना पड़ा, तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो को दूसरा मंत्री बनाने का विकल्प दिया जा सकता है। ऐसे में पार्टी के भीतर स्नेहलता, साक्षी, माधव आनंद और आलोक सिंह जैसे कद्दावर चेहरों के नाम रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस जनहित याचिका पर क्या रुख अपनाता है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारी बेचैनी पैदा कर दी है।