अब टेंडर घोटाला में IAS संजीव हंस की तलाश में जुटी SVU, रेड में तीन बड़े अधिकारी गिरफ्तार; 11.53 करोड़ की काली कमाई जब्त

भ्रष्टाचार में लिप्त IAS अफसर संजीव हंस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। राज्य में रिशुश्री के कारनामों और बहुचर्चित टेंडर घोटाले को लेकर स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में जहां तीन बेहद रसूखदार अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी संजीव हंस पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। 

अब टेंडर घोटाला में IAS संजीव हंस की तलाश में जुटी SVU, रेड में तीन बड़े अधिकारी गिरफ्तार; 11.53 करोड़ की काली कमाई जब्त

DESWA DESK : भ्रष्टाचार में लिप्त IAS अफसर संजीव हंस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। राज्य में रिशुश्री के कारनामों और बहुचर्चित टेंडर घोटाले को लेकर स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में जहां तीन बेहद रसूखदार अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी संजीव हंस पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। 

जांच एजेंसी की भनक लगते ही आईएएस संजीव हंस के फरार होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, एसवीयू की एक विशेष टीम आईएएस संजीव हंस को गिरफ्तार करने के लिए पटना में ऊर्जा स्टेडियम के पास स्थित उनके सरकारी आवास पर पहुंची थी। वहां उनके न मिलने पर टीम फौरन पुरानी सचिवालय स्थित राजस्व पर्षद (Board of Revenue) के उनके कार्यालय भी गई, जहां वे वर्तमान में तैनात हैं। 

हालांकि, संजीव हंस दोनों ही जगहों पर जांच एजेंसी के हाथ नहीं आए। बताया जा रहा है कि वे मंगलवार को दफ्तर आए थे, लेकिन गिरफ्तारी के डर से फिलहाल वे भूमिगत (फरार) हो गए हैं। पुलिस और एसवीयू की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसते हुए एसवीयू ने बुधवार को प्रशासनिक महकमे के तीन बड़े चेहरों को दबोच लिया। गिरफ्तार अधिकारियों में भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास,  वित्त विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी और बुडको (नगर विकास विभाग) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह शामिल हैंं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन तीनों अधिकारियों के ठिकानों से भ्रष्टाचार के जरिए जमा की गई 11.53 करोड़ रुपए की अकूत काली कमाई बरामद की गई है।

शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बिहार के कई महत्वपूर्ण विभागों में टेंडर आवंटन को लेकर बड़े पैमाने पर धांधली की गई। नियमों को ताक पर रखकर चहेते संवेदकों (ठेकेदारों) को टेंडर बांटे गए और इसके बदले में अधिकारियों के इस सिंडिकेट ने करोड़ों रुपए के कमीशन का खेल खेला। इस पूरे मामले में आईएएस संजीव हंस की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक महकमे में एक साथ तीन बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी और एक सीनियर आईएएस अफसर की तलाश में हुई छापेमारी से सचिवालय से लेकर सत्ता के गलियारों तक हड़कंप मच गया है।