SVU का ताबड़तोड़ एक्शन : टेंडर घोटाले में IAS समेत 3 जेल गए, अब हाजीपुर नगर परिषद के अकाउंटेंट के यहां मिले 2 करोड़ 

रिशुश्री टेंडर फिक्सिंग मामले में मुख्य अभियंता तारिणी दास की गिरफ्तारी और करोड़ों की बरामदगी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने हाजीपुर में एक बड़ी मछली को दबोच लिया है।

SVU का ताबड़तोड़ एक्शन : टेंडर घोटाले में IAS समेत 3 जेल गए, अब हाजीपुर नगर परिषद के अकाउंटेंट के यहां मिले 2 करोड़ 

DESWA DESK : बिहार में सरकारी खजाने और जनता की गाढ़ी कमाई की मची लूट के खिलाफ जांच एजेंसियां भी ताबड़तोड़ एक्शन में हैं। राज्य के रसूखदार अफसरों से लेकर छोटे सरकारी कर्मचारियों तक, दोनों हाथों से बिहार को लूटने वाले सफेदपोशों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। रिशुश्री टेंडर फिक्सिंग मामले में मुख्य अभियंता तारिणी दास की गिरफ्तारी और करोड़ों की बरामदगी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने हाजीपुर में एक बड़ी मछली को दबोच लिया है।

हाजीपुर नगर परिषद के अकाउंटेंट के ठिकानों पर रेड, 2 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस महाअभियान के तहत हाजीपुर नगर परिषद के लेखापाल (अकाउंटेंट) मनीष कुमार पर ईओयू (EOU) ने शिकंजा कसा है। मनीष कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA Case) का मामला दर्ज होने के बाद कोर्ट के आदेश पर बुधवार और गुरुवार को ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। अकाउंटेंट मनीष कुमार के हाजीपुर स्थित बागमली आवास और नगर परिषद कार्यालय सहित कुल दो ठिकानों पर अलग-अलग टीमों ने एक साथ दबिश दी। जांच एजेंसियों को अब तक की तलाशी में मनीष कुमार के पास से दो करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मनीष कुमार को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से नगर विकास विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक में हड़कंप मचा हुआ है।

टेंडर फिक्सिंग का 'महाघपला': 12 करोड़ की बरामदगी, IAS समेत 3 भेजे गए जेल
इससे पहले बुधवार को बिहार के प्रशासनिक गलियारे को हिलाकर रख देने वाले टेंडर फिक्सिंग मामले में बड़ी कार्रवाई हुई। तीन शीर्ष अधिकारियों के ठिकानों से करीब 12 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी और संपत्ति बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसी ने आईएएस अधिकारी मुमुक्ष चौधरी, मुख्य अभियंता तारिणी दास और कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया है।

दो IAS अधिकारी निलंबित, फरार आईएएस संजीव हंस की तलाश तेज
इस टेंडर घोटाले की आंच बिहार के शीर्ष नौकरशाहों तक पहुंच चुकी है। सरकार ने टेंडर घपले में सीधे तौर पर संलिप्तता पाए जाने के बाद आईएएस अधिकारी योगेश कुमार और आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, इस पूरे रैकेट के मुख्य किरदारों में से एक माने जा रहे सीनियर आईएएस संजीव हंस फिलहाल फरार चल रहे हैं। जांच एजेंसियां उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, संजीव हंस पर कानून का शिकंजा कसने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

ब्यूरोक्रेसी में खलबली, रडार पर कई और नाम
एक तरफ जहां आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी और निलंबन से सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक हड़कंप है, वहीं दूसरी तरफ निचले स्तर के बाबुओं और अकाउंटेंटों के यहां मिल रहे करोड़ों रुपये यह साबित कर रहे हैं कि बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि टेंडर फिक्सिंग और आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में अभी कई और सफेदपोशों और रसूखदारों के नाम सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां तय मानी जा रही हैं।